नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव (West Asia strain) के बीच पाकिस्तान और उसके सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर (Asim Munir) को लेकर नई रिपोर्टों ने कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान और सऊदी अरब के बीच तनाव कम कराने की कोशिशों के दौरान मुनीर और ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रमुख अहमद वाहिदी से जुड़े एक कथित तेल कारोबार की भूमिका रही। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की ओर से भी कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव
हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ा है। इसी बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब से जुड़े तेल टैंकरों को निशाना बनाने का दावा किया है। दूसरी ओर पाकिस्तान ने भी चेतावनी दी है कि यदि लाल सागर में उसके ध्वज वाले जहाजों या समुद्री हितों पर हमला हुआ तो वह इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानेगा।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में तीन अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि मार्च के अंतिम सप्ताह में आसिम मुनीर और IRGC प्रमुख अहमद वाहिदी के बीच एक संयुक्त तेल परिवहन व्यवस्था (जॉइंट वेंचर) को लेकर समझौता हुआ। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि इस व्यवस्था के तहत ईरान ने सऊदी अरब पर हमले सीमित करने की सहमति दी, जबकि ईरानी तेल का परिवहन पाकिस्तान के रास्ते जारी रहा।
इन रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि इस कथित व्यवस्था के बाद कुछ समय तक सऊदी अरब पर ईरान समर्थित हमलों में कमी देखी गई। हालांकि, इन दावों की पुष्टि किसी आधिकारिक दस्तावेज या स्वतंत्र जांच से नहीं हुई है।
रिपोर्टों में यह आरोप भी लगाया गया है कि कथित संयुक्त कारोबार से आसिम मुनीर और अहमद वाहिदी को व्यक्तिगत आर्थिक लाभ हुआ। साथ ही यह दावा किया गया कि अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरानी तेल के परिवहन के लिए वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में कोई आधिकारिक साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया गया है।
रणनीतिक समीकरणों पर चर्चा
विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान लंबे समय से ईरान और सऊदी अरब दोनों के साथ अपने संबंध संतुलित रखने की कोशिश करता रहा है। एक ओर उसे सऊदी अरब से आर्थिक और रक्षा सहयोग मिलता है, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ साझा सीमा और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े हित भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में बदलते घटनाक्रम पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक चुनौती बने हुए हैं।
आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय और वॉशिंगटन स्थित सऊदी अरब के दूतावास से प्रतिक्रिया मांगी गई थी, लेकिन खबर प्रकाशित होने तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला। इसी तरह संयुक्त अरब अमीरात और कतर पर भी अतीत में ईरान के साथ ऐसे कथित समझौतों के आरोप लगे थे, जिन्हें दोनों देशों ने सिरे से खारिज किया था।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved