
नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh)के मेरठ (Meerut)में बाल विवाह (Child Marriage)का एक गंभीर मामला सामने आया है। मेडिकल थाना क्षेत्र के शेरगढ़ी इलाके (Shergarhi area)में एक मंदिर में 13 साल की किशोरी की 20 साल के युवक से शादी कराई जा रही थी। मंदिर में शादी की रस्में चल रही थीं और दोनों पक्षों के लोग भी वहां मौजूद थे। इसी दौरान किसी ने पुलिस को नाबालिग लड़की की शादी कराए जाने की सूचना दे दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई। पुलिस को देखते ही वहां मौजूद लोगों में अफरा तफरी मच गई और दूल्हा समेत दोनों पक्षों के कई लोग मौके से भाग गए।
पुलिस को यह सूचना डायल 112 के जरिए मिली थी। मामला नाबालिग से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की और टीम को मंदिर भेजा गया। पुलिसकर्मी जब मौके पर पहुंचे तो वहां शादी की रस्में चल रही थीं। बताया गया कि लड़की की उम्र महज 13 साल है। वहीं जिस युवक से उसकी शादी कराई जा रही थी उसकी उम्र 20 साल बताई गई। पुलिस के पहुंचते ही शादी का कार्यक्रम रोक दिया गया।
मौके पर पुलिस को आखिर में किशोरी और उसकी मां ही मिलीं। दूल्हा और उसके परिवार के लोग वहां से जा चुके थे। लड़की पक्ष के भी कई लोग पुलिस को देखकर मौके से निकल गए। पुलिस किशोरी और उसकी मां को अपने साथ चौकी लेकर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू की।
जांच के दौरान किशोरी की उम्र से जुड़े दस्तावेजों और तथ्यों की पड़ताल की गई। उम्र की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने किशोरी को बाल कल्याण समिति यानी CWC के सुपुर्द कर दिया। फिलहाल बाल कल्याण समिति की ओर से किशोरी की काउंसलिंग कराई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि काउंसलिंग और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब पुलिस इस मामले में कई अहम सवालों के जवाब तलाश रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि 13 साल की बच्ची की शादी कराने का फैसला किसने लिया था। शादी में कौन कौन लोग शामिल थे और दूल्हा कौन है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि लड़की के परिवार और युवक के परिवार के बीच शादी को लेकर क्या बातचीत हुई थी। पुलिस के पहुंचते ही दूल्हा और कई लोगों के मौके से भाग जाने को भी जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
सीओ सिविल लाइन दीक्षा के मुताबिक पुलिस को डायल 112 के माध्यम से नाबालिग बच्ची की शादी कराए जाने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और शादी को रुकवा दिया गया। बच्ची के नाबालिग होने की पुष्टि होने के बाद उसे बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर दिया गया है। फिलहाल उसकी काउंसलिंग की जा रही है।
बाल विवाह बच्चों के अधिकार और उनके भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला है। ऐसे मामलों में प्रशासन और पुलिस की त्वरित कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण होती है। मेरठ की इस घटना में समय रहते सूचना मिलने और पुलिस के मौके पर पहुंचने से किशोरी की शादी रुक गई। अब पुलिस की जांच से यह साफ होगा कि इस शादी की तैयारी किसने कराई थी और इसमें शामिल लोगों की भूमिका क्या थी।
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