
नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में कानून-व्यवस्था और आतंकवाद (Terrorism) से प्रभावित पीड़ितों के लिए मुआवजे (compensation policy ) के नए नियम लागू होने जा रहे हैं. नए नियम के तहत आम नागरिकों की मौत पर 1 लाख रुपए और राज्य के मूल निवासी रक्षा बलों और CAPF जवानों की शहादत पर 25 लाख रुपए देने का प्रावधान है.
उपराज्यपाल ने एक नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसके मुताबिक सुरक्षा संबंधी व्यय (SRE) के तहत मुआवजा तय किया है. छुट्टी के दौरान या यात्रा के समय आतंकी घटनाओं में शहीद होने वाले अर्धसैनिक बलों के जवानों के परिजनों को भी इसका फायदा मिलेगा.
नए नियमों के तहत जम्मू-कश्मीर के मूल निवासी रक्षा बलों और CAPF के जवानों की देश में कहीं भी शहादत होने पर उनके परिजनों को 25 लाख का मुआवजा मिलेगा. हालांकि गैर-निवासी जवानों के परिजनों के लिए 5 लाख रुपए का मुआवजा तय किया गया है.
इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान या विशेष पुलिस अधिकारी (SPO) की मौत पर 5 लाख रुपए और पूर्व सैनिकों के परिवारों को 2 लाख रुपए दिए जाएंगे.
दिव्यांग और अन्य सरकारी कर्मचारियों के लिए अलग नियम
ड्यूटी के दौरान या आतंकी घटनाओं में पूरी तरह से दिव्यांग होने पर 75,000 और आंशिक दिव्यांगता पर 10,000 की वित्तीय सहायता दी जाएगी. पुलिसकर्मियों के मामले में राहत राशि मंजूर करने का अधिकार DGP के पास रहेगा. अन्य सरकारी कर्मचारियों की मौत पर उनके परिजनों को 1 लाख रुपए और कर्तव्यों का पालन करते हुए जान गंवाने वाले मैजिस्ट्रेट के लिए 2 लाख रुपए का मुआवजा तय किया गया है.
नागरिकों और संपत्ति नुकसान के लिए दिशा-निर्देश
कानून-व्यवस्था के बिगड़ने, अंतरराष्ट्रीय सीमा या LoC के पास हिंसक घटनाओं में जान गंवाने वाले आम नागरिकों, आत्मसमर्पण करने वाले आतंकियों और मुखबिरों के परिजनों को 1 लाख रुपए मुआवजा मिलेगा. हालांकि, ये रकम सिर्फ उन्हीं निर्दोष नागरिकों को दी जाएगी जो किसी भी तरह की हिंसा या उकसावे में शामिल नहीं थे.
सैन्य अभियानों के दौरान संपत्ति के नुकसान पर ज्यादा से ज्यादा 10 लाख रुपए या वास्तविक नुकसान (जो भी कम हो) की भरपाई की जाएगी. इसके साथ ही, सीमा पार से गोलाबारी में हुए नुकसान पर कुल नुकसान का 50 प्रतिशत या ज्यादा से ज्यादा 1 लाख रुपए मुआवजा दिया जाएगा.
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