आचंलिक

अस्पताल की एंबुलेंस में ड्रायवर ही नहीं, प्रशासन निजी वाहनों के भरोसे

माकड़ोन। शासकीय अस्पताल में एम्बुलेंस तो खड़ी नजर आ सकती है लेकिन बीते दो वर्षों से इस एम्बुलेंस को चलाने के लिए ड्रायवर ही नहीं हैं। ऐसी स्थिति में किसी गंभीर स्थिति वाले मरीज को यदि इंदौर या उज्जैन रैफर करने की नौबत आती है तो अस्पताल प्रशासन निजी वाहनों के भरोसे रहते हैं। कई बार यह स्थिति भी निर्मित हो जाती है कि समय पर निजी वाहन ही नहीं मिलते हैं और ऐसे में मरीजों के साथ ही उनके परिजनों को परेशान होना पड़ता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र माकडोन में गेल इंडिया लिमिटेड तथा विधायक महेश परमार द्वारा अलग-अलग एंबुलेंस गंभीर मरीजों को अन्यत्र लाने ले जाने के लिए नि:शुल्क भेंट की गई है लेकिन चालक के अभाव में उक्त एंबुलेंस हॉस्पिटल की शोभा बढ़ा रही है।


जहां गेल इंडिया लिमिटेड की एंबुलेंस को चलाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र माकड़ोन में चालक की व्यवस्था थी लेकिन चालक 2 साल पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अब ऐसी स्थिति में यह एम्बुलेंस अस्पताल परिसर में पड़ी हुई है। इसी तरह एक वर्ष पहले विधायक महेश परमार ने भी विधायक निधि से एम्बुलेंस स्वीकृत करवा कर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र माकड़ोन को सौंपी थी। परंतु इसमें भी ड्रायवर की नियुक्ति आज तक नहीं हो सकी है।

इनका कहना है
चालक के सेवानिवृत्त होने के बाद किसी अन्य चालक की नियुक्ति नहीं हुई है। हमारे द्वारा कई बार उच्च अधिकारियों को मौखिक व पत्र के माध्यम से अवगत करवाया गया है। जल्द ही चालक की नियुक्ति करवाने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. रजत पाटीदार, मेडिकल आफिसर माकड़ोन

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