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अब पूर्वी मोर्चे पर चीन के खतरों का मुकाबला करने को राफेल तैयार

– पश्चिम बंगाल में लड़ाकू राफेल विमानों की दूसरी स्क्वाड्रन हुई ऑपरेशनल

नई दिल्ली। राफेल फाइटर जेट (Rafale fighter jet) अब चीन के साथ पूर्वी मोर्चे (Eastern Front with China) पर खतरों का मुकाबला करने के लिए तैयार है क्योंकि दूसरी स्क्वाड्रन 101 (Squadron 101) बुधवार से ऑपरेशनल हो गई है। पश्चिम बंगाल के हाशिमारा एयरबेस में इस स्क्वाड्रन को ‘फाल्कन्स ऑफ चंब एंड अखनूर’ की उपाधि दी गई है। आज अंबाला स्क्वाड्रन से पहली बार इस एयरबेस पर तीन राफेल विमान उतरे जिन्हें ‘वाटर सैल्यूट’ किया गया। इस मौके पर एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने कहा कि इस स्क्वाड्रन के ऑपरेशनल होने से पूर्वी क्षेत्र में दुश्मन हमेशा भयभीत रहेंगे और भारतीय वायु सेना की पूर्वोत्तर में चीन सीमा पर ताकत बढ़ेगी।

भारत ने 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए 2016 में फ्रांस के साथ सौदा किया था। रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने बुधवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में जानकारी दी कि भारत को अब तक फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन से 36 में से 26 राफेल विमान मिले हैं जो भारत आ चुके हैं। फ्रांस के साथ एक अंतर-सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर करने के लगभग चार साल बाद 29 जुलाई 2020 को पांच राफेल जेट विमानों का पहला जत्था भारत आया था। रूस से सुखोई जेट आयात किए जाने के बाद 23 वर्षों में राफेल जेट भारत का पहला बड़ा लड़ाकू विमान है। इस साल के अंत तक भारत को 09 और राफेल मिल जाएंगे। आखिरी यानी 36वां राफेल लड़ाकू विमान जनवरी 2022 में वायुसेना को मिलेगा। इसके बाद डसॉल्ट एविएशन कंपनी नागपुर में राफेल लड़ाकू विमान का सर्विसिंग सेंटर भी स्थापित करेगी।

वायुसेना को मिलने वाले 36 राफेल विमानों में से 30 युद्धक विमान और छह प्रशिक्षण विमान होंगे। भारतीय वायुसेना ने पांच विमानों को औपचारिक रूप से अपने बेड़े में 10 सितम्बर 2020 को शामिल किया था। अब तक भारत को मिले सभी 26 विमान अंबाला एयरबेस पर राफेल की पहली 17 स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरो’ में रखे गए हैं। एक स्क्वाड्रन में 18 विमान होते हैं, इसलिए अब 08 विमान पश्चिम बंगाल के हाशिमारा एयरबेस पर आज से ऑपरेशनल की गई दूसरी स्क्वाड्रन ‘फाल्कन्स ऑफ चंब एंड अखनूर’ का हिस्सा होंगे। इसके बाद फ्रांस से आने वाले 10 विमानों को भी इसी स्क्वाड्रन में शामिल किया जाएगा। पश्चिमी और पूर्वी मोर्चों पर ‘टू फ्रंट वार’ की तैयारियों के बीच राफेल फाइटर जेट की मिसाइल स्कैल्प को पहाड़ी इलाकों में अटैक करने के लिहाज से अपग्रेड किया गया है।

दूसरी स्क्वाड्रन को ऑपरेशनल करने के लिए आज तीन राफेल विमान अंबाला एयरबेस से उड़कर हाशिमारा एयरबेस पर फ्लाई पास्ट करने के बाद उतरे। इन तीनों विमानों को औपचारिक रूप से भारतीय वायु सेना ने पूर्वी वायु कमान (ईएसी) में वायु सेना स्टेशन हाशिमारा में बनाई गई दूसरी स्क्वाड्रन में शामिल किया गया। इस मौके पर वायुसेना की परंपरा के अनुसार तीनों राफेल जेट्स को ‘वाटर सैल्यूट’ किया गया। अब अंबाला स्क्वाड्रन से राफेल विमान अगले कुछ दिनों में हाशिमारा एयरबेस के लिए फेरी लगाना शुरू कर देंगे। हाशिमारा स्क्वाड्रन मुख्य रूप से चीन स्थित पूर्वी सीमा की देखभाल के लिए जिम्मेदार होगी जबकि अंबाला की स्क्वाड्रन लद्दाख में चीन के साथ उत्तरी सीमाओं और पाकिस्तान के साथ अन्य क्षेत्रों की देखभाल करेगी।

इस मौके पर वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने कहा कि इस स्क्वाड्रन के ऑपरेशनल होने से पूर्वी क्षेत्र में दुश्मन हमेशा भयभीत रहेंगे और भारतीय वायु सेना की पूर्वोत्तर में चीन सीमा पर ताकत बढ़ेगी। एयर चीफ मार्शल ने कहा कि हाशिमारा एयरबेस पर राफेल की दूसरी स्क्वाड्रन बनाने की योजना पूर्वी क्षेत्र में भारतीय वायुसेना की क्षमता को मजबूत करने के महत्व को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। उन्होंने 101 स्क्वाड्रन के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए कहा कि इसका गठन 01 मई 1949 को पालम में किया गया था। अतीत में इस स्क्वाड्रन ने हार्वर्ड, स्पिटफायर, वैम्पायर, सुखोई-7 और मिग-21एम विमानों का संचालन किया है। इस स्क्वाड्रन का गौरवशाली इतिहास 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों में सक्रिय भागीदारी होने से भी जुड़ा है। उन्होंने वायुसेना कर्मियों से पूरे उत्साह और बेजोड़ क्षमता के साथ इस स्क्वाड्रन में जुड़ने का आग्रह किया। (एजेंसी, हि.स.)

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