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उमर अब्दुल्ला के फैसले से पार्टी में बढ़ी खींचतान, मंत्रिमंडल से बाहर नेताओं की नाराजगी खुलकर आई सामने

October 31, 2026

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir)की सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (Ruling National Conference)में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Chief Minister Omar Abdullah)के मंत्रिमंडल विस्तार (Cabinet expansion)के बाद पार्टी के भीतर असंतोष के सुर तेज हो गए हैं। कैबिनेट में जगह नहीं मिलने से नाराज कई वरिष्ठ विधायकों ने शुक्रवार को श्रीनगर में एक बंद कमरे में बैठक की। इस बैठक में 17 नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायकों के साथ एक निर्दलीय विधायक के शामिल होने की खबर है। बैठक का आयोजन विधायक कैसर जमशेद लोन के आवास पर किया गया। पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी और श्रीनगर से सांसद रूहुल्लाह मेहदी के इस्तीफे के ऐलान ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बैठक में वरिष्ठ नेता मुबारक गुल और अब्दुल मजीद लर्मी सहित कई विधायक मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि इन नेताओं ने हालिया कैबिनेट विस्तार पर अपनी नाराजगी जाहिर की और आगे की रणनीति पर चर्चा की। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि विधायकों का एक समूह उन मंत्रियों को हटाने की मांग कर रहा है जिन्होंने सरकार में दो साल पूरे कर लिए हैं। उनकी जगह नए चेहरों को मौका देने और मंत्रिमंडल में वरिष्ठता तथा योग्यता को महत्व देने की मांग उठाई गई है। हालांकि बैठक के बाद विधायकों की ओर से कोई साझा आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।

इस नाराजगी की एक बड़ी वजह मुबारक गुल और अब्दुल मजीद लर्मी जैसे वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलना बताया जा रहा है। मुबारक गुल ईदगाह से विधायक हैं और लंबे समय से पार्टी से जुड़े हुए हैं। कैबिनेट सूची में नाम नहीं आने के बाद उनके समर्थकों ने भी नाराजगी जताई थी। गुल ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उनके कार्यकर्ता और समर्थक उनके साथ हुए व्यवहार से आहत हैं और चाहते हैं कि वह पार्टी छोड़ दें। उन्होंने यह भी कहा था कि वह करीब 50 साल से पार्टी के साथ जुड़े हैं। वहीं अब्दुल मजीद लर्मी ने भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने पर निराशा जाहिर की थी।

इस बीच पार्टी के भीतर संगठनात्मक पदों को लेकर भी हलचल दिखाई दी। पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने अली मोहम्मद सागर को महासचिव पद पर बने रहने का निर्देश दिया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ जब मुबारक गुल को हाल ही में महासचिव बनाए जाने की चर्चा थी। इस फैसले को पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी के बीच एक अहम संगठनात्मक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए दूसरी बड़ी चुनौती श्रीनगर के सांसद आगा रूहुल्लाह मेहदी का इस्तीफा देने का ऐलान है। उन्होंने कहा है कि वह 3 नवंबर को पार्टी और लोकसभा सदस्यता दोनों से इस्तीफा देंगे। रूहुल्लाह ने पार्टी नेतृत्व पर चुनावी वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पार्टी ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बहाली और लोगों के अधिकारों की रक्षा जैसे मुद्दों को लेकर जनता से समर्थन मांगा था लेकिन सत्ता में आने के बाद उन वादों पर अपेक्षित काम नहीं हुआ। उनके इस ऐलान ने पार्टी नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।


  • गौरतलब है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 27 अक्टूबर को मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए अली मोहम्मद सागर मीर सैफुल्ला शमीम फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी को मंत्री पद की शपथ दिलाई थी। इस विस्तार के बाद नौ सदस्यीय मंत्रिमंडल में कश्मीर घाटी का प्रतिनिधित्व बढ़कर सात मंत्रियों तक पहुंच गया जबकि जम्मू क्षेत्र से उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और जावेद राणा शामिल हैं।

    फिलहाल नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर असंतोष की वास्तविक सीमा और आगे की रणनीति स्पष्ट नहीं है। लेकिन वरिष्ठ विधायकों की बैठक और रूहुल्लाह मेहदी के इस्तीफे के ऐलान ने पार्टी नेतृत्व के सामने संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की चुनौती जरूर बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में नेतृत्व इन मतभेदों को किस तरह सुलझाता है इस पर जम्मू-कश्मीर की राजनीति की नजर रहेगी।

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