नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 (Article 370) हटाए जाने की सातवीं वर्षगांठ से पहले पाकिस्तान ने 5 अगस्त को प्रस्तावित भारत विरोधी अभियान की तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार अभियान को केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित रखने के बजाय सेना, सरकारी मंत्रालयों, सुरक्षा एजेंसियों और रणनीतिक संस्थानों के समन्वय से चलाने की योजना बनाई गई है।
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान सेना मुख्यालय (जीएचक्यू) में एक विशेष कमांड रूम स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं, जहां से पूरे अभियान की निगरानी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय किया जाएगा। इस अभियान को उच्च प्राथमिकता देते हुए कई सरकारी संस्थानों को तय समयसीमा के भीतर अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, 2 जुलाई को इस्लामाबाद स्थित कश्मीर मामलों एवं गिलगित-बाल्टिस्तान मंत्रालय में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में पाकिस्तान सरकार के 70 से अधिक मंत्रालयों, रक्षा प्रतिष्ठानों, सैन्य संस्थानों, विमानन एजेंसियों और सुरक्षा संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में मौजूद सैन्य अधिकारियों ने अभियान को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने पर जोर दिया और सभी संबंधित विभागों को समन्वित रूप से काम करने के निर्देश दिए।
बैठक में पाकिस्तान की सैन्य और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। इनमें रावलपिंडी स्थित मिलिट्री लैंड्स एंड कैंटोनमेंट्स के अतिरिक्त महानिदेशक, पाकिस्तान आर्म्ड सर्विसेज बोर्ड एवं सचिवालय के महानिदेशक, रक्षा मंत्रालय के अधिकारी, जीएचक्यू रावलपिंडी से जुड़े सैन्य अधिकारी, डिफेंस डिवीजन के प्रतिनिधि, एयरपोर्ट सिक्योरिटी फोर्स के महानिदेशक, पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पाकिस्तान मैरीटाइम सिक्योरिटी एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी तथा आईएसआई से जुड़े अधिकारी शामिल बताए गए हैं।
भारत सरकार ने 5 अगस्त 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 और 35ए के अधिकांश प्रावधानों को समाप्त करते हुए जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया था। इसी के साथ जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम लागू करते हुए तत्कालीन राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेश—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में विभाजित किया गया था।
पाकिस्तान इस फैसले का लगातार विरोध करता रहा है और हर वर्ष 5 अगस्त को ‘यौमे इस्तेहसाल’ के रूप में मनाते हुए भारत विरोधी कार्यक्रम आयोजित करता है। वहीं भारत का लगातार यही रुख रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख देश के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं तथा इनसे जुड़े सभी निर्णय भारत के आंतरिक विषय हैं।
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