
नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) की आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ (Autobiography Belonging: A Journey of Love) को भारत में प्रकाशित नहीं करने को लेकर उठे विवाद पर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (PRHI) ने सफाई दी है। प्रकाशक ने कहा कि किताब न छापने का फैसला किसी बाहरी दबाव की वजह से नहीं, बल्कि संपादकीय चर्चा के दौरान एक खास मुद्दे पर सहमति नहीं बनने के कारण हुआ।
अमेरिकी प्रकाशक अल्फ्रेड ए. नॉफ के मुताबिक यह किताब 10 नवंबर को दुनियाभर में प्रकाशित होगी। नॉफ भी पेंगुइन रैंडम हाउस का ही एक प्रकाशन संस्थान है।
कांग्रेस नेताओं ने उठाए थे सवाल
किताब के भारत में प्रकाशन से पीछे हटने के बाद कांग्रेस के कई नेताओं ने सरकार के कथित दबाव और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए थे। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया था कि पेंगुइन इंडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस और मोदी सरकार के दौरान चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र पर किए गए कब्जे से जुड़े अंश हटाने का दबाव था।
हालांकि, PRHI ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि किताब को प्रकाशित नहीं करने के फैसले के पीछे किसी तरह का बाहरी हस्तक्षेप नहीं था।
पेंगुइन ने क्या कहा?
PRHI की प्रवक्ता पल्लवी नारायण ने PTI-भाषा से बातचीत में कहा कि प्रकाशक ‘बिलॉन्गिंग’ को प्रकाशित करने के लिए उत्सुक था और इसके अधिकार हासिल करने के लिए काफी प्रयास किए गए थे। उन्होंने कहा कि किताब की सामग्री फिलहाल गोपनीय है और प्रकाशन से पहले उस पर एम्बार्गो लागू है। इसलिए किसी बाहरी दबाव की बात सही नहीं है।
प्रकाशक के मुताबिक पांडुलिपि पर सामान्य संपादकीय प्रक्रिया के तहत चर्चा हुई। इस दौरान कई मुद्दे उठाए गए और सोनिया गांधी के प्रतिनिधियों के साथ उन पर विचार-विमर्श किया गया।
कुछ बदलावों पर सहमति बनी, एक मुद्दे पर बात अटकी
PRHI ने बताया कि कुछ सुझावों पर लेखिका की टीम ने बदलाव स्वीकार किए, जबकि कुछ अन्य मामलों में प्रकाशक ने लेखक के रुख को मान लिया। लेकिन एक खास मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी।
इसके बाद सोनिया गांधी की टीम ने प्रकाशक को बताया कि वह किताब के प्रकाशन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाना चाहती। पेंगुइन ने कहा कि उसने लेखिका के इस फैसले का सम्मान किया।
उस मुद्दे का खुलासा क्यों नहीं किया?
प्रकाशक ने कहा कि वह उस मुद्दे का विवरण सार्वजनिक नहीं कर सकता, क्योंकि वह एक समझौते से बंधा हुआ है और लेखक की गोपनीयता उसके लिए सर्वोपरि है।
PRHI ने यह भी कहा कि किसी पांडुलिपि का आलोचनात्मक मूल्यांकन करना, सवाल उठाना, सुझाव देना और स्वतंत्र संपादकीय फैसला लेना प्रकाशक की जिम्मेदारी है। ‘बिलॉन्गिंग’ के मामले में भी इसी सामान्य प्रक्रिया का पालन किया गया।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved