
नई दिल्ली। NEET पेपर लीक मामले के बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर एनटीए को भंग करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि मौजूदा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी, जो सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत बनाई गई है, उसे खत्म कर संसद के कानून के जरिए एक नई वैधानिक राष्ट्रीय परीक्षा संस्था बनाई जानी चाहिए।
याचिका में केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि संसद में कानून लाकर ऐसी नई राष्ट्रीय परीक्षा संस्था बनाई जाए, जिसके पास स्पष्ट कानूनी अधिकार हों, पारदर्शिता के सख्त नियम हों और जो सीधे संसद के प्रति जवाबदेह हो। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं का संचालन करने वाली संस्था के पास मजबूत कानूनी ढांचा और जवाबदेही व्यवस्था होना जरूरी है। बता दें कि यह याचिका ऐसे समय में दाखिल की गई है जब नीट पेपर लीक मामले की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है।
NEET मामले में गिरफ्तार मास्टरमाइंड माने जा रहे लेक्चरर पीवी कुलकर्णी से पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में पीवी कुलकर्णी के अलावा अन्य लोगों की भी बड़ी भूमिका रही है। सूत्रों के मुताबिक पीवी कुलकर्णी और मनीषा वाघमारे के साथ 2 और लेक्चरर भी पेपर लीक कराने में अहम भूमिका निभा रहे थे। CBI इन दोनों की तलाश में पुणे और लातूर में लगातार छापेमारी कर रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि ये दोनों लेक्चरर एनटीए के साथ नीट परीक्षा संचालन से जुड़े हुए थे और पीवी कुलकर्णी के साथ मिलकर काम कर रहे थे।
आरोप है कि पुणे के एक संस्थान में पीवी कुलकर्णी, मनीषा वाघमारे और उनके 2 सहयोगी लेक्चररों ने छात्रों को अलग-अलग सवाल और उनके सही जवाब नोटबुक में लिखवाए थे। CBI जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के मुताबिक मनीषा वाघमारे के नाम से एक नया बैंक खाता खुलवाया गया था, जिसमें छात्रों से लाखों रुपये ट्रांसफर करवाए गए। इस बैंक खाते को सीबीआई ने फिलहाल सीज कर दिया है और पैसों के लेनदेन की जांच की जा रही है। फिलहाल सीबीआई पीवी कुलकर्णी के दोनों फरार सहयोगियों की तलाश में जुटी हुई है।
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