चैन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय (Tamil Nadu Chief Minister Vijay) और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) की सरकार बनने के बाद अब नया राजनीतिक विवाद (political controversy) खड़ा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका (PIL) में विजय सरकार के विश्वास मत को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बहुमत साबित करने के दौरान विधायकों की खरीद-फरोख्त और राजनीतिक सौदेबाजी हुई, जिसकी सीबीआई जांच कराई जानी चाहिए।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि विधानसभा में हुआ फ्लोर टेस्ट पूरी तरह पारदर्शी और लोकतांत्रिक तरीके से नहीं कराया गया। कुछ विधायकों ने अपनी पार्टी के व्हिप का उल्लंघन करते हुए टीवीके सरकार के पक्ष में मतदान किया। दावा किया गया कि इसके पीछे आर्थिक और राजनीतिक लाभ दिए गए।
दरअसल, बहुमत परीक्षण के दौरान अन्नाद्रमुक (AIADMK) के 25 विधायकों ने पार्टी लाइन से अलग जाकर विजय सरकार के समर्थन में वोट किया था। इसके बाद टीवीके गठबंधन 144 विधायकों के समर्थन तक पहुंच गया और विजय सरकार ने आसानी से विश्वास मत हासिल कर लिया।
याचिका में मांग की गई है कि पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए और जांच पूरी होने तक राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए। साथ ही विधानसभा भंग करने की भी मांग रखी गई है।
गौरतलब है कि चार मई को आए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव परिणामों में पहली बार चुनाव मैदान में उतरी विजय की पार्टी टीवीके ने बड़ा उलटफेर करते हुए 108 सीटें जीती थीं। बाद में कांग्रेस, वीसीके, वामपंथी दलों और अन्य सहयोगी दलों के समर्थन से विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
इधर राजनीतिक हलचल के बीच तमिलनाडु सरकार में सहयोगी दलों की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश भी शुरू हो गई है। राज्य के लोक निर्माण एवं खेल विकास मंत्री आधव अर्जुन ने कांग्रेस, वीसीके और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) को मंत्रिमंडल में शामिल होने का खुला न्योता दिया है।
अर्जुन ने कहा कि मुख्यमंत्री विजय चाहते हैं कि सहयोगी दल एक परिवार की तरह मिलकर सरकार चलाएं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) ने सत्ता से दूर रखने के लिए आपसी राजनीतिक समझौते किए थे, लेकिन जनता ने टीवीके के पक्ष में फैसला दिया।
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