
- ट्रेनों की आवाजाही सुरक्षित होने के साथ समय भी बचेगा
उज्जैन। सिंहस्थ-2028 को देखते हुए रेलवे ने उज्जैन सहित आसपास के स्टेशनों पर तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। सबसे अहम यह कि रेलवे अब उज्जैन-इंदौर व नागदा-भोपाल के बीच ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम लगाएगा। इससे ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुरक्षित होने के साथ ही समय भी बचेगा।
रेलवे उज्जैन सहित आसपास के इन स्टेशनों को अपग्रेड करेंगे। इसमें उज्जैन विक्रमनगर, चिंतामण, पिंगलेश्वर और नईखेड़ी स्टेशनों का विकास और नवीनीकरण किया जाएगा। अभी नागदा से गोधरा सेक्शन पर ऑटोमैटिक सिग्नलिंग का काम चल रहा है, जो लगभग 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है। आने वाले समय में रेलवे इंदौर-उज्जैन व नागदा-भोपाल के टेंडर करेगा। टारगेट यही रहेगा कि सिंहस्थ के पहले यह काम पूरा कर लिया जाए। इसके अलावा उज्जैन-इंदौर के आसपास के स्टेशनों का नवीनीकरण भी होगा। रेलवे नईखेड़ी-चिंतामण गणेश के बीच रेल बायपास लाइन बनाएगा, जिससे ट्रेनों को इंजन की दिशा बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी और संचालन तेज होगा।
ऑटोमैटिक सिस्टम से सुरक्षा अधिक
- स्टेशन और कंट्रोल रूम से ट्रेन मूवमेंट की बेहतर मॉनिटरिंग होती है, जिससे पूरी रेल व्यवस्था सुचारु रहती है।
- ऑटोमैटिक सिग्नलिंग से ज्यादा ट्रेनें चलाकर भीड़ को बेहतर सिंहस्थ में भीड़ रहेगी। रेलवे देशभर से ट्रेनों का संचालन करेगा।
- इस सिस्टम में ट्रैक छोटे-छोटे ब्लॉक्स में बंट जाता है, जिससे एक ही लाइन पर ज्यादा ट्रेनें सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए चल सकती हैं। अगर आगे ट्रैक पर ट्रेन है तो सिग्नल अपने आप रेड हो जाता है।
- इससे टक्कर, दुर्घटना की आशंका बहुत कम हो जाती है। ट्रेनों को बार-बार रुकना नहीं पड़ता, सिग्नल ऑटोमैटिक बदलते हैं। इससे यात्रा का समय कम होता है और ट्रेनें समय पर चलती हैं।
- मैन्युअल सिग्नलिंग में गलती की संभावना रहती है, लेकिन ऑटोमैटिक सिस्टम में सेंसर और तकनीक काम करती है, जिससे गलती की गुंजाइश घटती है।