
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री (Prime Minister) नरेंद्र मोदी ( Narendra Modi) न्यूजीलैंड (New Zealand) के दौरे पर हैं. इस दौरे के दौरान भारत और न्यूजीलैंड ने अपने समुद्री सहयोग को और मजबूत करने का बड़ा फैसला लिया है. दोनों देशों के बीच जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों पक्षों ने एक नए मैरीटाइम कोऑपरेशन अरेंजमेंट (Maritime Cooperation Arrangement) यानी समुद्री सहयोग व्यवस्था पर सहमति बना ली है. इसके साथ ही एक म्यूचुअल लॉजिस्टिक सपोर्ट अरेंजमेंट भी तैयार किया गया है जो खासतौर पर समुद्री क्षेत्र से जुड़े कामों पर केंद्रित होगा.
इस समझौते के तहत अब भारत और न्यूजीलैंड हर साल एक मैरीटाइम सिक्योरिटी डायलॉग यानी समुद्री सुरक्षा वार्ता आयोजित करेंगे. इसका मकसद दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर लगातार बातचीत बनाए रखना है. साथ ही रक्षा मंत्रालय और सैन्य सेवाओं के स्तर पर भी दोनों देशों के बीच नियमित और व्यवस्थित संपर्क बना रहेगा, ताकि दोनों देश एक दूसरे के साथ मिलकर काम कर सकें.
दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने इस मौके पर आतंकवाद रोधी अभियानों और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी मिलकर काम करने का भरोसा जताया. दोनों नेताओं ने कहा कि वे इस तरह की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर भी करीबी सहयोग के मौके तलाशेंगे. इसका बड़ा मकसद अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा और मजबूती को बढ़ावा देना बताया गया है.
बयान में कॉम्बाइंड टास्क फोर्स 150 यानी सीटीएफ-150 के तहत चल रहे सहयोग का भी खास तौर पर जिक्र किया गया. यह एक संयुक्त सैन्य पहल है जिसका काम मध्य पूर्व और पश्चिमी हिंद महासागर क्षेत्र में मादक पदार्थों की तस्करी, आतंकवाद और अवैध समुद्री गतिविधियों को रोकना है.
दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस टास्क फोर्स के तहत भारत और न्यूजीलैंड के बीच चल रहे तालमेल की सराहना की और इसे आगे भी जारी रखने पर सहमति जताई. कुल मिलाकर यह संयुक्त बयान भारत और न्यूजीलैंड के बीच रक्षा और समुद्री सुरक्षा क्षेत्र में बढ़ते भरोसे और सहयोग को दिखाता है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में उभर रहे इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए मैं कुछ उदाहरण आपके सामने रखना चाहता हूं. भारत में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए हमने प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना शुरू की है. इसके तहत फूड प्रोसेसिंग से लेकर टेक्सटाइल समेत 14 क्षेत्रों में लगभग 20 बिलियन डॉलर का समर्थन दिया जा रहा है.
भारत में एयरपोर्ट, रीजनल कनेक्टिविटी, एयर कार्गो और पर्यटन तेजी से बढ़ रहे हैं. आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार है. हम मिलकर कार्गो कॉरिडोर, फ्लाइट कनेक्टिविटी और संयुक्त पर्यटन पैकेज विकसित कर सकते हैं. फल, सब्जियों और सी-फूड के लिए बेहतर पेरिशेबल कार्गो सॉल्यूशंस भी तैयार किए जा सकते हैं.
न्यूजीलैंड के पास हॉर्टिकल्चर, डेयरी साइंस और फॉरेस्ट्री में व्यापक विशेषज्ञता है. भारत के पास विशाल उपभोक्ता बाजार, फूड पार्क और एग्रीटेक टैलेंट की ताकत है. हम मिलकर ‘फार्म टू मार्केट’ वैल्यू चेन और वैश्विक निर्यात प्लेटफॉर्म तैयार कर सकते हैं.
फिनटेक के क्षेत्र में आज भारत वैश्विक नेतृत्व कर रहा है. दुनिया में होने वाले करीब 50 प्रतिशत रियल-टाइम डिजिटल भुगतान भारत में होते हैं. हम डिजिटल पेमेंट्स के साथ-साथ ग्रीन बॉन्ड्स जैसे क्षेत्रों में भी साथ मिलकर आगे बढ़ सकते हैं.
हमने स्पेस सेक्टर को निजी भागीदारी के लिए खोल दिया है. आज भारत में 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप काम कर रहे हैं और अब तो इस क्षेत्र में एक यूनिकॉर्न भी बन चुका है. दोनों देशों की कंपनियां भारत के स्पेस इकोसिस्टम के साथ मिलकर स्मॉल सैटेलाइट्स, रिमोट सेंसिंग और ओशन मॉनिटरिंग जैसे क्षेत्रों में काम कर सकती हैं. भारत में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 100 शहरों में हजारों परियोजनाओं पर काम चल रहा है. हम शहरी परिवहन, जल प्रबंधन और वेस्ट मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ा सकते हैं.
10 समझौतों और 8 बड़ी घोषणाओं पर बनी सहमति
ऑकलैंड में भारत-न्यूजीलैंड शिखर सम्मेलन के बाद कुल 18 नतीजे सामने आए. इनमें 10 समझौते और 8 घोषणाएं शामिल हैं. दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया.
रक्षा, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग, पर्यटन, संस्कृति, खेल, आपदा प्रबंधन, कृषि, व्यापार, शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी. साथ ही 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया.
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