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आयुष्मान के अटके भुगतान पर निजी अस्पतालों की मश्किलें बढ़ीं

October 03, 2026

  • नभ एक्रेडिटेशन की अनिवार्यता पर स्पष्टता, लंबित दावों के भुगतान और पैनल अस्पतालों से हो समान व्यवहार

जबलपुर। आयुष्मान भारत-निरामयम योजना के क्रियान्वयन को लेकर निजी अस्पतालों की विभिन्न समस्याओं और चिंताओं को लेकर एमपी नर्सिंग होम एसोसिएशन (एमपीएनएचए)-यूनाइटेड हॉस्पिटल्स एसोसिएशन, जबलपुर ने 2 अक्टूबर को आईएमए हॉल, रानीताल में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। एसोसिएशन ने कहा कि निजी अस्पताल योजना के लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भागीदार हैं, लेकिन भुगतान और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़ी समस्याओं के कारण अस्पतालों पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है।



  • एसोसिएशन ने योजना में शामिल अस्पतालों के लिए नभ (एनएबीएच) एक्रेडिटेशन अनिवार्य किए जाने के कानूनी एवं नीतिगत आधार पर स्पष्टता की मांग की। साथ ही योजना के तहत अस्पतालों द्वारा किए गए वैध दावों के भुगतान में हो रही देरी को प्रमुख समस्या बताते हुए लंबित बकाया राशि के समयबद्ध निपटारे के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाने की मांग की। अस्पताल संचालकों का कहना है कि लंबे समय तक भुगतान लंबित रहने से अस्पतालों की नियमित वित्तीय व्यवस्था प्रभावित होती है और इसका असर सेवाओं की निरंतरता पर भी पड़ सकता है। उन्होंने लंबित भुगतान से होने वाले वित्तीय प्रभावों को भी उचित रूप से संबोधित करने की आवश्यकता जताई।

    शिकायतों के लिए निष्पक्ष व्यवस्था की मांग
    एसोसिएशन ने भुगतान, अनुबंध और अन्य वित्तीय मामलों से जुड़ी वैध शिकायतों को उठाने के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष ग्रीवांस मैकेनिज्म की मांग की। संगठन का कहना है कि अस्पतालों को अपनी समस्याएं उचित माध्यम से रखने का अवसर मिलना चाहिए और शिकायतें उठाने पर अनुपातहीन प्रशासनिक कार्रवाई की आशंका नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा सभी एंपैनल्ड अस्पतालों के साथ समान और पारदर्शी व्यवहार की मांग करते हुए स्पष्ट नियम लागू करने पर जोर दिया गया। एसोसिएशन ने कहा कि नियमों का पालन कर योजना के तहत सेवाएं देने वाले अस्पतालों के खिलाफ किसी भी कार्रवाई से पहले स्पष्ट प्रक्रिया का पालन हो और संबंधित संस्थान को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।

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