
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) में इस बार कई अप्रत्याशित नतीजे सामने आए, जिनमें सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं रत्ना देवनाथ (Ratna Devnath)। एक डॉक्टर बेटी (Doctor Daughter) को खोने के दर्द से जूझ रही इस मां ने राजनीति की परंपरागत राह से अलग हटकर चुनावी मैदान में कदम रखा और 28 हजार से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल कर विधानसभा (Assembly) पहुंच गईं।
टीएमसी उम्मीदवार को बड़े अंतर से हराया
दक्षिण 24 परगना क्षेत्र की पानीहाटी सीट से भाजपा उम्मीदवार रत्ना देवनाथ ने तृणमूल कांग्रेस के तीर्थंकर घोष को बड़े अंतर से हराया। कभी राजनीति से पूरी तरह अनजान रहीं रत्ना देवनाथ ने निजी जीवन के दर्द को अपनी ताकत बनाया और महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे को चुनावी अभियान का केंद्र बनाया।
साल 2024 में आरजी कर मेडिकल कॉलेज की एक छात्रा के साथ हुई दर्दनाक घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था। गैंगरेप और हत्या की इस घटना के बाद रत्ना देवनाथ ने सार्वजनिक रूप से महिलाओं की सुरक्षा और न्याय में देरी के खिलाफ आवाज उठानी शुरू की। इसी दौरान भाजपा ने उनसे संपर्क किया और उन्हें चुनावी मैदान में उतारा।
कौन है रत्ना देवनाथ
54 वर्षीय रत्ना देवनाथ, जो एक साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आती हैं, ने बताया कि उनका मकसद महिलाओं को न्याय और सुरक्षा दिलाने की दिशा में काम करना है। उनके पति रंजन देवनाथ हैं और चुनावी हलफनामे के अनुसार उनकी संपत्ति लगभग 74 लाख रुपये है। भाजपा ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए रत्ना देवनाथ को उम्मीदवार बनाया। नामांकन के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी मौजूद रहीं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल को पानीहाटी में उनके समर्थन में रैली की थी।
इस चुनाव में भाजपा ने पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 207 सीटें हासिल कीं, जबकि तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस और वाम दलों को सीमित सफलता मिली। इस राजनीतिक बदलाव के बीच रत्ना देवनाथ की जीत को व्यक्तिगत संघर्ष और सामाजिक मुद्दों की जीत के रूप में देखा जा रहा है।
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