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अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से झटका, 1993 मुंबई ब्लास्ट मामले में समयपूर्व रिहाई की याचिका हुई खारिज

September 10, 2026

नई दिल्ली । 1993 मुंबई सीरियल बम धमाके (1993 Mumbai Serial Bomb Blasts) मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे गैंगस्टर अबू सलेम (Abu Salem) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से राहत नहीं मिली है। अदालत ने उसकी समय से पहले रिहाई की मांग वाली याचिका खारिज(petition rejected) कर दी। सलेम ने अपनी सजा पूरी होने का दावा करते हुए जल्द रिहाई की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उसकी दलील को स्वीकार नहीं किया।

12 मार्च 1993 को मुंबई के 12 अलग-अलग इलाकों में एक के बाद एक बम धमाके हुए थे। इन सिलसिलेवार धमाकों में 257 लोगों की मौत हुई थी, जबकि करीब 800 लोग घायल हुए थे। जांच में सामने आया था कि इन हमलों को बाबरी मस्जिद विध्वंस का बदला लेने के मकसद से अंजाम दिया गया था।

जांच के दौरान अबू सलेम की भूमिका इस पूरी साजिश में अहम बताई गई थी। जांच में यह साबित हुआ कि वह हमले की योजना बनाने में शामिल था। उसके बारे में यह भी सामने आया कि उसने गुजरात के भरुच से मुंबई तक हथियार और विस्फोटक पहुंचाए थे। इसके अलावा उसे हत्या के मामले में भी दोषी ठहराया गया था।

इन मामलों के आधार पर विशेष टाडा अदालत ने अबू सलेम को 25 साल कैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद उसने समय से पहले जेल से रिहाई की मांग को लेकर अदालत का रुख किया। सलेम की ओर से दलील दी गई कि पुर्तगाल के साथ हुए प्रत्यर्पण समझौते के तहत उसे 25 साल से ज्यादा समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता।

अबू सलेम की यह दलील अदालतों के सामने पहले भी रखी जा चुकी है। हालांकि, उसे कई बार खारिज किया गया। बॉम्बे हाईकोर्ट भी सलेम की इसी तरह की याचिका को पहले ठुकरा चुका है। हाईकोर्ट ने सजा में मिलने वाली छूट की गणना को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया था।

हाईकोर्ट के अनुसार, सजा में मिलने वाली छूट की गणना रिहाई की निर्धारित तारीख से केवल एक महीने पहले की जा सकती है। इसलिए मौजूदा समय में यह मानना सही नहीं होगा कि अबू सलेम की सजा पूरी हो चुकी है। इसी आधार पर उसकी समयपूर्व रिहाई की मांग को स्वीकार नहीं किया गया था।

अब सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला भी इसी रुख के अनुरूप आया है। अदालत ने अबू सलेम की जल्द रिहाई की मांग को खारिज कर दिया है। सलेम ने प्रत्यर्पण समझौते में तय 25 साल की अवधि को आधार बनाकर जेल से बाहर आने की मांग की थी, लेकिन उसकी इस दलील से अदालत ने राहत नहीं दी।


  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अबू सलेम की समयपूर्व रिहाई की मौजूदा कोशिश सफल नहीं हो सकी है। अदालतों के पहले के फैसलों और अब सुप्रीम कोर्ट के रुख से यह स्पष्ट है कि फिलहाल उसकी सजा पूरी मानकर तत्काल रिहाई नहीं की जा सकती। 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में वह अपनी सजा काटता रहेगा।

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