
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आज बुधवार को कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में अहम फैसला लेते हुए पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को समन भेजने वाले स्पेशल CBI कोर्ट के 2015 के आदेश को रद्द कर दिया. कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट के पास CBI की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने और उनके खिलाफ संज्ञान लेने का कोई आधार नहीं था.
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने पूर्व प्रधानमंत्री की अपील को स्वीकार किया, उन्हें क्लीन चिट देने वाली CBI की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया और मामले से जुड़ी कार्यवाही बंद कर दी.
हालांकि डॉक्टर मनमोहन सिंह का निधन दिसंबर 2024 में हो गया था, फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश की वैधता की जांच करने का फैसला किया क्योंकि उसमें उनके खिलाफ कई प्रतिकूल टिप्पणियां की गई थीं. स्वर्गीय पूर्व प्रधानमंत्री की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि मनमोहन सिंह के निधन के बाद भले ही तकनीकी रूप से यह अपील निष्प्रभावी हो गई थी, लेकिन ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों पर ध्यान देना जरूरी था.
सिब्बल ने बेंच से कहा, “मामलों में से एक डॉ. मनमोहन सिंह से जुड़ा मामला है.” साथ ही उन्होंने कोर्ट से पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाने का अनुरोध किया. इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि केस का निपटारा किया जा सकता है, जिस पर सिब्बल ने जवाब दिया कि मामले में ट्रायल कोर्ट ने संज्ञान लिया था और प्रतिकूल टिप्पणियां की थीं जिन्हें हटाया जाना चाहिए.
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