भोपाल

नौनिहालों के कंधों पर स्कूलों ने बढ़ा दिया बस्तों का बोझ

  • बाल संरक्षण आयोग ने सभी जिला शिक्षाधिकारियों से कहा कम कराएं

भोपाल। स्कूली शिक्षा के बाजारीकरण के दौर में स्कूलों ने बच्चों के बस्तों का बोझ तय मानकों से कई गुना तक ज्यादा बड़ा दिया है। इसको लेकर मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों केा पत्र लिखकर बच्चों के बस्तों का बोझ कम कराने के निर्देश दिए हैं। आयेाग ने कहा है कि प्रायमरी में पढऩे वाले बच्चों बस्तों का वजन भारी भरकम है। कहीं-कहंीं तो बस्तों में 20 से 30 किलो तक का वजन पाया गया है। यह भारत सरकार की निर्धारित मानकों का खुला उल्लंघन है। साथ ही बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ रहा है। बाल आयोग ने भारत सरकार द्वारा नवंबर 2020 में जारी की गई स्कूल बैग पॉलिसी का हवाला देते हुए कहा कि पॉलिसी के अनुसार स्कूल बैग का वजन बच्चों के बजन से 10 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए। जबकि निरीक्षण में सामने आया है कि प्रायमरी के बच्चों के स्कूल बैग का वजन उनके शरीर के वजन से 50 प्रतिशत या उससे भी अधिक है। ऐसे में इससे बच्चों शारीरिक विकास और स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। यहां बता दें कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने नई शिक्षा नीति के साथ ही स्कूल बैग पॉलिसी 2020 लागू कर दी थी। पॉलिसी को लागू करने के संंबंध में केंद्र सरकार ने सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रालय को निर्देशित किया था।

राज्य सरकार का कोई नियंत्रण नहीं
स्कूल बैग को लेकर राज्य सरकार ने कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किए हैं। न ही सरकार की ओर से अभी तक स्कूल बैग को लेकर केाई कार्रवाई की है। जबकि प्रदेश में स्कूल खासकर निजी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों के बैग का वजन पॉलिसी का खुला उल्लंघन है। खास बात है कि प्रदेश में कुछ ऐसे स्कूल भी हैं, जिनकी ओर से अतिरिक्त पाठय़क्रम भी दिया जाता है, जिसका वजन ही केंद्रीय स्कूल बैग नीति में निर्धारित स्कूल बैग के वजन से ज्यादा होता है।

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