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Surat: हादसे का सबूत नहीं होने के बाद भी कार मालिक को मिला 1.25 लाख का इंश्योरेंस क्लेम

June 25, 2026

सूरत। गुजरात (Gujarat) के सूरत (Surat) में एक कार मालिक (Car Owner) को अपनी क्षतिग्रस्त कार के लिए 1.25 लाख रुपये का इंश्योरेंस क्लेम (Insurance claim) मिला है, भले ही दुर्घटना की सटीक परिस्थितियों को साबित करने में नाकाम रहा। नवसारी कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने इस मामले में उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने कहा कि भले ही हादसे को लेकर कई संदिग्ध पहलू हैं, लेकिन कार को नुकसान पहुंचने की बात पर कोई विवाद नहीं है, इसलिए शिकायतकर्ता मुआवजे का पूरी तरह से हकदार है।

क्या है मामला?
यह मामला नवसारी के रहने वाले 43 वर्षीय चिराग देसाई का है। उन्होंने 18 अक्टूबर 2022 को अपनी कार के लिए ICICI लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदी थी। इस एक साल की पॉलिसी के लिए उन्होंने 6,853 रुपये का प्रीमियम भरा था। पॉलिसी में गाड़ी की इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू 3.10 लाख रुपये तय की गई थी, जिसमें अपनी गाड़ी को होने वाले नुकसान के साथ-साथ थर्ड-पार्टी रिस्क भी कवर किया गया था।


  • आयोग की टिप्पणी पर अंतिम फैसला
    सभी सबूतों की जांच के बाद आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता ट्रक का रजिस्ट्रेशन नंबर और ड्राइवर की पहचान जैसी जरूरी जानकारी देने में नाकाम रहा था। देरी से मरम्मत के लिए भेजना और गवाहों का न होना दुर्घटना को लेकर संदेह जरूर पैदा करता है। हालांकि, आयोग ने इस तथ्य को भी मजबूती से रखा कि गाड़ी को निश्चित रूप से नुकसान पहुंचा था, जिसका आकलन बीमा कंपनी के ही सर्वेयर ने 1.25 लाख रुपये किया था।

    सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी के वकील ने भी इस राशि का भुगतान करने की इच्छा जताई थी। आयोग ने कहा कि नुकसान की बात स्वीकार करने के बावजूद दावे को पूरी तरह खारिज कर देना बीमा कंपनी की ओर से ‘सेवा में कमी’ को दर्शाता है।

    अपने अंतिम आदेश में, नवसारी उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह सर्वेयर द्वारा तय की गई 1.25 लाख रुपये की राशि का भुगतान शिकायतकर्ता को करे। इसके अलावा, मामले के दौरान हुई शारीरिक और मानसिक परेशानी के लिए कंपनी को 15,000 रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देने का भी आदेश दिया गया है।

    कंपनी द्वारा क्लेम खारिज
    चिराग देसाई के अनुसार, 20 जून 2023 को उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। उन्होंने गाड़ी के पूरी तरह से क्षतिग्रस्त होने का दावा करते हुए बीमा कंपनी से 3.10 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की। नुकसान का आकलन करने के लिए कंपनी ने सर्वेयर नियुक्त किया, लेकिन 27 जुलाई 2023 को बीमा कंपनी ने उनका क्लेम यह कहते हुए खारिज कर दिया कि नुकसान का कारण संदिग्ध है और उपभोक्ता द्वारा जरूरी जानकारी छिपाई गई है।

    कंपनी को यह भी अजीब लगा कि टोटल लॉस के दावे के बावजूद कोई पुलिस शिकायत या FIR दर्ज नहीं कराई गई थी। इसके बाद 4 अक्टूबर 2024 को देसाई ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

    जांच रिपोर्ट में क्या आया सामने?
    मामले की सुनवाई के दौरान बात सामने आई कि बीमा कंपनी ने क्लेम की जांच के लिए एक स्वतंत्र जांचकर्ता भी नियुक्त किया था। इस जांच रिपोर्ट में कथित दुर्घटना को लेकर कई सवाल उठाए गए। रिपोर्ट के अनुसार, गाड़ी के डैशबोर्ड को हुआ नुकसान किसी ट्रक से हुई टक्कर जैसा नहीं था। इसके अलावा, दुर्घटना की जगह ड्राइवर को लगी चोटों और घटना की अन्य परिस्थितियों में भी भारी विरोधाभास पाए गए। अधिकारी ने गौर किया कि टोटल लॉस के दावे के बावजूद ड्राइवर को केवल मामूली चोटें आईं और उसने कोई मेडिकल इलाज नहीं कराया। साथ ही, घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं था और दुर्घटना के चार दिन बाद कार को मरम्मत के लिए गैरेज भेजा गया था।

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