
भोपाल। मध्य प्रदेश में शराब माफियाओं (Liquor mafias) के हौसले बुलंद है। बेखौफ शराब और खनन माफिया कार्रवाई करने वाले अफसरों की जान पर भाड़ी पड़ते हुए नजर आ रहे है। देवास के खातेगांव में ट्रक से कुचलकर टीआई की हत्या कर दी गई। यह कोई पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी अवैध कारोबार में संलिप्त लोगों ने अफसरों को मौत के घाट उतारा है।
बीती रात 1 से 2 बजे के बीच हरदा-नेमावर हाईवे पर ट्रक क्रमांक MP 43 H 4786 ढाबे पर पानी पीने रुका था। चेकिंग के दौरान ट्रक का पिछला पहिया खातेगांव टीआई दिलीप पुरी के ऊपर से गुजर गया। अवैध शराब तस्करी की सूचना पर खातेगांव टीआई अपनी टीम के साथ पहुंचे थे। इसी दौरान शराब से भरे आयशर ट्रक ने कुचल दिया। जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया जा रहा है कि दिलीप पुरी के शरीर पर कई जगह गंभीर चोटें आई थी और काफी खून बह गया था। इसके बाद आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया। जहां करीब दो घंटे तक इलाज और सीपीआर के बाद भी उन्हें नहीं बचाया जा सका। इस घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी अवैध कारोबार में संलिप्त लोगों ने अफसरों की हत्या की है।
2012 – नरेंद्र कुमार सिंह (IPS), मुरैना: अवैध पत्थर से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर मौत
2015 – धर्मेद्र चौहान (आरक्षक), मुरैना: अवैध रेत से भरे डंपर के नीचे दबने से मौत
2016 – नरेंद्र शर्मा (वनरक्षक), ग्वालियर: अवैध रेत की ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से मौत
2018 – सुबेदार सिंह कुशवाह (डिप्टी रेंजर), मुरैना: रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर मौत
2023 – प्रसन्न सिंह बघेल (पटवारी), शहडोल: अवैध रेत परिवहन रोकने के दौरान ट्रैक्टर से कुचलकर मौत
2024 – महेंद्र बागरी (ASI), शहडोल: अवैध रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर मौत
प्रदेश में लगातार हो रही इन घटनाओं को लेकर चर्चा का बाजार गर्म है। एक के बाद एक कानून की रक्षा करने वाले और कार्रवाई करने जाने वालों अफसरों पर शराब और खनन माफिया भारी पड़ रहे है। जिनके आगे अब सिस्टम बेबस नजर आ रहा है। माफियाओं के इस दुस्साहस से एमपी की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे है।
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