
नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के पुंछ जिले (Poonch district) के सलोतरी इलाके में उस समय सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं जब पाकिस्तान (Pakistan) अधिकृत कश्मीर (PoK) से एक नाबालिग लड़का भारतीय सीमा में प्रवेश करता हुआ पकड़ा गया. पकड़े गए लड़के की पहचान जाविद अली (पिता मोहम्मद शरीफ), निवासी टेट्रिनोट, PoK के रूप में हुई है. सुरक्षा बलों ने संदिग्ध क्षेत्र में उसकी गतिविधि देखी और तुरंत उसे हिरासत में ले लिया.
शुरुआती पूछताछ में जाविद अली ने बताया कि वह नदी में नहाने गया था और गलती से सीमा रेखा (LoC) पार कर भारत की तरफ आ गया. हालांकि सुरक्षा एजेंसियां इस बयान को सीधे तौर पर स्वीकार नहीं कर रही हैं और हर पहलू से मामले की जांच की जा रही है. अधिकारियों के मुताबिक, यह भी ध्यान में रखा जा रहा है कि पहले भी कई बार पाकिस्तान की तरफ से नाबालिगों का इस्तेमाल सीमा की निगरानी और भारतीय सुरक्षा व्यवस्था को परखने के लिए किया जाता रहा है.
लॉन्च पैड्स पर आतंकी घुसपैठ की फिराक में
एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि अगर जांच में यह साफ हो जाता है कि लड़का वाकई गलती से आया है, तो उसे 24 घंटे के भीतर पाकिस्तानी अधिकारियों को सौंप दिया जाएगा, ताकि वह अपने परिवार से मिल सके. फिलहाल किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है. इसी बीच खुफिया इनपुट्स में यह भी संकेत मिले हैं कि सीमा पार कई लॉन्च पैड्स पर आतंकी घुसपैठ की फिराक में हैं और गर्मियों के मौसम में जम्मू-कश्मीर में गतिविधियां बढ़ सकती हैं.
पीओके में हालात तनावपूर्ण, 30 से ज्यादा की मौत
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब PoK में हालात भी तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, हालिया फायरिंग और अशांति में 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं. स्थानीय लोग लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं. रावलाकोट में एक मानवाधिकार कार्यकर्ता के अंतिम संस्कार के दौरान जुटी भीड़ पर सुरक्षा बलों की कथित गोलीबारी ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है. इस घटना में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग घायल बताए जा रहे हैं.
महंगाई और अधिकारों के मुद्दे पर जारी है आंदोलन
दरअसल, पिछले कई महीनों से पीओके में एक प्रभावशाली नागरिक संगठन महंगाई, बढ़ते बिजली बिलों और आटे की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के खिलाफ आंदोलन चला रहा है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आम लोगों का जीवन मुश्किल होता जा रहा है, लेकिन उनकी समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा. आंदोलनकारी सिर्फ आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं हैं. वे राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों की बहाली की भी मांग कर रहे हैं. उनका आरोप है कि क्षेत्र के लोगों को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व और बुनियादी अधिकार नहीं मिल रहे हैं.
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