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नई पीढ़ी के फायरब्रांड नेताओं के उभार से भाजपा हुई और मजबूत, शुभेंदु-हिमंता-योगी मनवा रहे नाम का लोहा

May 07, 2026

नई दिल्ली. पिछले पांच वर्षों में मजबूत क्षेत्रीय नेताओं के उभार ने भाजपा (BJP) के लिए भविष्य में नेतृत्व के संकट की समस्या को दूर कर दिया है। पार्टी के पास पहले से उत्तर में योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath), पश्चिम में देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) मजबूत क्षत्रप बन कर उभरे हैं, जबकि हालिया विधानसभा चुनाव ने अब पूर्वोत्तर में हिमंत बिस्व सरमा (Himanta Biswa Sarma) और पूरब में शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) के रूप में हिंदुत्व का नया और फायरब्रांड नेता दिया है। इस कड़ी में ओडिशा और बिहार के मुख्यमंत्री क्रमश: मोहन चरण माझी और सम्राट चौधरी को फिलहाल खुद को साबित करना है। दिलचस्प तथ्य यह है ये सभी क्षत्रप 50 से 60 वर्ष के बीच के आयुवर्ग के हैं।

नए क्षत्रपों में योगी, शुभेंदु, हिमंत हिंदुत्व के फायरब्रांड नेता हैं, तो फडणवीस की छवि जहीन रणनीतिकार के रूप में उभरी है। वहीं, सम्राट ने सीएम पद संभालने के बाद कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने की मिली केंद्रीय नेतृत्व की अहम सलाह को सख्ती के साथ जमीन पर उतारना शुरू किया है। इसकी बानगी बिहार में पुलिस की ओर से अपराधियों के सफाए के लिए शुरू किए गए अभियान और बुलडोजर सेवा में नजर आती है।


  • शुभेंदु पर टिकीं निगाहें
    अपने दम पर आक्रामक हिंदुत्व के सहारे असम में पार्टी को चुनावी वैतरणी पार करा चुके हिमंत ने खुद को साबित कर दिखाया है। अब निगाहें लगातार दो चुनाव में ममता बनर्जी को हराने वाले शुभेंदु पर टिकी हैं। उन पर पूरब के सबसे अहम राज्य को गुजरात की तर्ज पर हिंदुत्व की नई प्रयोगशाला बनाने की जिम्मेदारी है। भाजपा के सबका साथ सबका विकास नारे से दूरी बरतते हुए जो हमारे साथ, हम उसके साथ का नारा देकर हिंदुत्व की आक्रामक राजनीति के संकेत दिए हैं।

    अब दक्षिण में कसक दूर करने के भी प्रयास
    नई पीढ़ी के मजबूत नेताओं को विकसित करने के मामले में भाजपा की समस्या दक्षिण भारत है। एक समय कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा के रूप में पार्टी को अहम चेहरा हाथ लगा था। वर्तमान में तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में पार्टी अपनी रणनीति के अनुरूप सफल नहीं हो पा रही।

    संदेश यह भी
    हिमंत व सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाकर और शुभेंदु को उपकृत कर पार्टी ने बाहर से आने वाले नेताओं को अहम पद देने का संदेश दिया है। सभी के पास डेढ़ से दो दशक का समय : नई पीढ़ी के नए क्षत्रप के रूप में उभरे इन सभी नेताओं की उम्र 58 साल से कम है। हिमंत और सम्राट 57 साल, शुभेंदु और फडणवीस 55, मोहन चरण माझी 54 तो योगी महज 53 साल के हैं। अगर 75 वर्ष की उम्र को पैमाना माना जाए, तो इन मजबूत क्षत्रपों के पास पार्टी को सेवाएं देने के लिए 18 से 22 साल तक का लंबा समय है। वर्तमान में पहली पीढ़ी के पीएम मोदी के बाद सर्वाधिक दिग्गज नेता अमित शाह 61 साल के हैं। वहीं, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन महज 45 वर्ष के हैं।

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