नई दिल्ली। अगर आपसे पूछा जाए कि दुनिया की सबसे निचली आबादी कहां रहती है, तो शायद इसका जवाब देना आसान न हो। लेकिन इजरायल (Israel) में डेड सी (Dead Sea) के किनारे बसा एक छोटा-सा गांव इस अनोखे रिकॉर्ड का मालिक है। समुद्र तल से 400 मीटर से अधिक नीचे स्थित यह जगह न केवल अपनी भौगोलिक स्थिति के लिए मशहूर है, बल्कि यहां की हवा, जलवायु और प्राकृतिक परिस्थितियां भी दुनिया के बाकी हिस्सों से काफी अलग हैं।
दुनिया की सबसे निचली स्थायी मानव बस्ती नेवे जोहर (Neve Zohar) इजरायल के दक्षिणी हिस्से में डेड सी के पास स्थित है। यह जॉर्डन रिफ्ट वैली में हाईवे-31 और हाईवे-90 के जंक्शन के निकट बसा हुआ है। समुद्र तल से करीब 400 मीटर से भी अधिक नीचे होने के कारण इसे धरती की सबसे निचली आबादी वाला स्थान माना जाता है।
इस क्षेत्र की सबसे खास बात इसकी वायुमंडलीय परिस्थितियां हैं। अधिक गहराई पर स्थित होने के कारण यहां वायुदाब सामान्य स्थानों की तुलना में ज्यादा होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसी वजह से यहां की हवा में करीब 8 से 10 प्रतिशत अधिक ऑक्सीजन उपलब्ध रहती है। माना जाता है कि यह वातावरण अस्थमा और कुछ श्वसन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए अपेक्षाकृत आरामदायक हो सकता है।
डेड सी घाटी की एक और दिलचस्प विशेषता यह है कि यहां तक पहुंचने वाली सूर्य की हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणों का प्रभाव अपेक्षाकृत कम हो जाता है। अतिरिक्त वायुमंडलीय परत प्राकृतिक फिल्टर की तरह काम करती है, जिससे तेज धूप के बावजूद सनबर्न का खतरा सामान्य स्थानों की तुलना में कम माना जाता है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नेवे जोहर की स्थायी आबादी केवल 166 लोगों के आसपास है। छोटा गांव होने के बावजूद यह तामार रीजनल काउंसिल का प्रशासनिक मुख्यालय है। यहां एक प्राथमिक विद्यालय, छोटा संग्रहालय और सीमित संख्या में आवासीय मकान मौजूद हैं।
नेवे जोहर का इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है। इसकी स्थापना 1964 में डेड सी क्षेत्र में काम करने वाले फैक्ट्री कर्मचारियों के लिए एक वर्क कैंप के रूप में की गई थी। समय के साथ यहां स्थायी आवास विकसित हुए और यह एक छोटे लेकिन व्यवस्थित गांव में बदल गया।
गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित एन बोकेक (Ein Bokek) क्षेत्र डेड सी का प्रमुख होटल और रिसॉर्ट केंद्र है, जहां हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं।
व्यावसायिक पर्यटन के विस्तार के बावजूद नेवे जोहर ने अपनी शांत पहचान कायम रखी है। यहां के कई स्थानीय परिवारों ने अपने घरों को छोटे गेस्ट हाउस या ‘जिमर्स’ में बदल दिया है, जहां अपेक्षाकृत कम खर्च में पर्यटक ठहर सकते हैं और डेड सी के अनोखे अनुभव का आनंद ले सकते हैं।
प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ यहां कई चुनौतियां भी हैं। गर्मियों में तापमान अक्सर 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। अत्यधिक गर्म और शुष्क मौसम के कारण दोपहर के समय बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। पूरे वर्ष यहां केवल 40 से 50 मिलीमीटर के बीच ही बारिश होती है।
इसके अलावा गांव में बड़े बाजार, सुपरमार्केट या आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं नहीं हैं। रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लोगों को लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित अराद शहर जाना पड़ता है, इसलिए निजी वाहन यहां लगभग अनिवार्य माने जाते हैं।
डेड सी दुनिया की सबसे अधिक खारे जलाशयों में शामिल है। इसके पानी में लगभग 34 प्रतिशत लवणता होती है, जो सामान्य समुद्री पानी की तुलना में कई गुना अधिक है। एक लीटर पानी में करीब 340 ग्राम नमक और अन्य खनिज घुले रहते हैं। यही वजह है कि यहां पानी का घनत्व इतना अधिक होता है कि लोग आसानी से इसकी सतह पर तैरते रहते हैं और डूबना बेहद कठिन होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, डेड सी का जलस्तर हर साल लगभग एक मीटर घट रहा है। जलस्तर कम होने से आसपास की जमीन में सिंकहोल बनने की घटनाएं बढ़ रही हैं, जो भविष्य में इस क्षेत्र के भूगोल और बस्तियों के लिए चुनौती बन सकती हैं।
रेगिस्तान, नमक से ढके तट, गहरे नीले पानी और असाधारण भौगोलिक परिस्थितियों के बीच बसा नेवे जोहर इस बात का अनोखा उदाहरण है कि इंसान पृथ्वी के सबसे अलग और कठिन इलाकों में भी अपना आशियाना बना सकता है। यही विशेषताएं इसे दुनिया की सबसे अनोखी मानव बस्तियों में शामिल करती हैं।
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