
इंदौर से कई रीलबाज नेता दतिया पहुंच गए
उपचुनाव का क्या होते हैँ कि उन नेताओं के लिए अपने आपको चमकाने का मौका आ जाता है, जो केवल राजनीति में नाम के लिए अपने पद का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे कई रीलबाज नेता भाजपा में भी हैं, जो अपना चेहरा दिखाने और फोटो सोशल मीडिया पर डालने के लिए दतिया उपचुनाव में पहुंंच गए हैं। वे किसी न किसी बड़े नेता को पकडक़र उनके साथ ऐसे खड़े हो जाते हैं, जैसे ये ही अब चुनाव जिताकर ले आएंगे, जबकि हकीकत यह रहती है कि उन्हें वहां कोई पहचानता तक नहीं है, जो उनके कहने पर वोट दे सके। पार्टी का एक स्ट्रेटजी प्लान जरूर होता है कि बड़े नेताओं को वहां सभा और मीटिंग करने बुलाया जाए। ऐसे ही एक या दो नेताओं को दतिया में बुलाया गया है और उन्हें जवाबदारी संगठन ने सौंपी है, लेकिन इंदौर के कई हवाबाज नेता भी वहां मतदाताओं को तो कम प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि नेताओं के आगे-पीछे ज्यादा नजर आ रहे हैं और थोड़ी ही देर में सोशल मीडिया पर फोटो डालकर अपना प्रचार भी कर रहे हैं।
पार्षद के खिलाफ क्यों फूटा गुस्सा?
जब अपनी ही पार्टी के लोग अपने ही पार्षद पर गुस्सा निकाले तो सवाल लाजमी हो जाता है। पिछले दिनों महावर नगर में पानी को लेकर लोगों ने चक्काजाम करने की कोशिश की। मालूम पड़ा कि ये भाजपा और संघ से जुड़े लोग हैं, जो अपने ही पार्षद के खिलाफ नाराज हैं। लोगों का तो यह कहना हैकि कई बार पार्षद को समस्या बताई, लेकिन उन्होंने हल नहीं किया। जब प्रदर्शन हुआ तब भी पार्षद अपने लोगों की समस्या सुलझाने के लिए आगे नहीं आए और एमआईसी मेम्बर राकेश जैन को पहुंचा दिया।
अब आए तो इन्हें पार्टी में मत लेना अध्यक्षजी
कांग्रेस नेता के जन्मदिन का मौका था। बात चली उन नेताओं की जो कांग्रेस छोडक़र भाजपा में चले गए हंै और उन्हें वहां भी पर्याप्त सम्मान नहीं मिल रहा है। किसी ने कहा कि देखना ये चुनाव तक वापस आ जाएंगे। इतने में कांग्रेसी बोल पड़े कि अध्यक्षजी चाहे कुछ भी हो जाए, ऐसे अवसरवादियों को पार्टी में मत लेना। इनमें वे नेता भी थे, जो भाजपा में गए नेताओं की प्रशंसा करते-करते नहीं थकते थे। उनके सामने उनकी बोलती बंद रहती थी। चिंटू भी सबकी हां में हां मिलाते रहे,। उन्होंने बोल दिया कि मैं तो किसी की वापसी नहीं करूंगा। खैर ये तो वक्त ही बताएगा कि विधानसभा चुनाव के पहले हालात क्या बनते है। अभी से बोलना जल्दबाजी ही होगा।
वास्तव में सांई इशारों से काम करते हैं?
विजयवर्गीय का सांई यानी शंकर लालवानी को लेकर की गई चुटकी कि वे इशारों से काम करते हैं, ज्यादा बोलते नहीं है, को लेकर कई नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रिया सामने आई है। किसी ने कहा कि वास्तव में सांई के इशारे इंदौर की राजनीति में उनका मुकाम अलग ही बनाते हैं तो कई कहते हैं कि सांई की ये आदत तो शुरू से ही। कई नेता अब इन इशारों को लेकर कह रहे हैं कि इंदौर ताई-भाई और सांई की जोड़ी के बाद भी आगे नहीं बढ़ पा रहा है। यहां की राजनीति न केवल आगे बढऩे दी जा रही है, बल्कि सभी गुटों को ऊपर वालों ने एक सीमा में बांध रखा है। यही कारण है कि सत्ता और संगठन की नियुक्तियों के माध्यम से आने वाले लोग अभी भी भोपाल की ओर आस लगाए बैठे हैं।
इंदौरी नेताओं को वीआईपी कल्चर पसंद है
कुछ भी हो जाए, लेकिन इंदौरी नेता वीआईपी कल्चर को छोड़ नहीं सकते। चाहे वे भाजपा के हो या कांग्रेस के। कहीं न कहीं वे अपना रसूख दिखा ही देते हैँं। ऐसा ही कुछ वाहनों की नंबर प्लेट और गाड़ी पर बजते कानफोड़ू हूटर से साबित होता है। जिसका इनकी गाड़ी में कोई नाम नहीं है, लेकिन रूआब तो आखिर रूआब होता है। अगर कचरा गाड़ी वाला हूटर लगा सकता है तो फिर नेताजी को तो लगाने का हक बनता ही है। बुद्धिजीवियों का कहना है कि इसको लेकर प्रदेश में ही दो कानून चल रहे हैं। भोपाल में तो पुलिस ने ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की, लेकिन इंदौर पुलिस नेताओं के वीआईपी कल्चर के आगे बेबस नजर आई।
नगर निगम पर ये कैसा आप का प्रदर्शन
आम आदमी पार्टी के कर्ताधर्ताओं ने नगर निगम में हो रहे भ्रष्टाचार को लेकर प्रदर्शन करने की घोषणा की थी। घोषणा तो ऐसी थी कि बड़ी संख्या में आप के कार्यकर्ता वहां पहुंचेंगे और प्रदर्शन करेंगे, लेकिन प्रदर्शन को देखते हुए आम लोग भी आश्चर्य में पड़ गए। जिन दो राज्यों में आप ने सत्ता सुख भोगा, उसकी हालत एमपी में बद से बदतर हो गई और मात्र 10 लोग भी प्रदर्शन में इक_ा नहीं हो पाए। हालांकि दावा किया जाता है कि पार्टी के साथ आम आदमी बड़ी संख्या में जुड़ा हुआ है, लेकिन ये आम आदमी कहां था। खैर नेताओं ने प्रदर्शन की इतिश्री की और अपने घरों को लौट गए।
सांवेर की राजनीति को गर्म कर गए दिग्गी राजा
दिग्गी राजा ने सावन सोनकर को सांवेर से चुनाव लडऩे की बात क्या कह दी, सांवेर की राजनीति गर्म हो गई और ऐसा बवंडर उठा है, जो अभी अंदर है, लेकिन इसके बाहर आने में देरी नहीं लगेगी। इंदौरी राजनीति के पंडित अनुमान लगा रहे हैं कि आखिर दिग्गी को सांवेर की राजनीति में क्या दिलचस्पी है? जो वे इस तरह का बयान देकर चले गए? वैसे दिग्गी के निशाने पर शुरू से ही तुलसी सिलावट और उनके राजनीतिक गुरु ज्योतिरादित्य सिंधिया रहे हैं और इसी का बदला निकालने के लिए उन्होंने यह बयान दे दिया या कहे कि अब तुलसी की उम्र भी हो गई है और हो सकता है कि पार्टी उनके स्थान पर अब किसी ओर को सांवेर से मौका दे दे।
लगता है महापौर पुष्यमित्र भार्गव का झुकाव अब उज्जैन की ओर ज्यादा होने लगा है। उज्जैन रोड पर बने पुल के उद्घाटन में महापौर ने गैर हिन्दुओं को इक_ा करके मुख्यमंत्री का स्वागत करवा दिया और उन्हें बता दिया कि इंदौर में केवल मैंने ही यूसीसी को लेकर वाहवाही करवाई और नंबर बढ़ा लिए। -संजीव मालवीय
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