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इस साल होमगार्ड के जवानों ने 215 लोगों की जान बचाई.. शिप्रा में डूब रहे थे लेकिन सुरक्षित बाहर निकाला

December 02, 2025

  • 85 जवानों की ड्यूटी लगी है घाटों पर-कई बार अपनी जान जोखिम में डालकर बचाई जान-सीढिय़ों पर रहती है फिसलन

उज्जैन। होमगार्ड और एसडीआरएफ के जवानों ने साल 2025 में अब तक शिप्रा के घाटों पर रेस्क्यू ऑपरेशन करते हुए करीब 215 लोगों की जिन्दगियाँ बचाई हैं। इसमें महाकालेश्वर मंदिर दर्शन करने आए श्रद्धालुओं की संख्या अधिक हैं। उल्लेखनीय है कि शिप्रा नदी में नहाना खतरनाक हो गया है और आए दिन लोगों की मौत हो रही है। यदि घाट पर जवान लोगों की जान न बचाए तो मरने वालों की संख्या काफी अधिक हो सकती थी। जिले में मोक्षदायिनी क्षिप्रा नदी के तट पर बने रामघाट, दत्त अखाड़ा एवं नृसिंह घाट पर देशभर से प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिप्रा माँ में श्रद्धा की डुबकी लगाने एवं महाकाल दर्शन के लिए उज्जैन आते हैं।


  • श्रद्धालु स्नान करते समय गहरे पानी में चले जाते हैं जिससे वह डूबने लगते हैं। जिला होमगार्ड कमांडेंट संतोष कुमार जाट ने बताया कि नदी का जल स्तर बढ़ा होने से डूब की घटनाएँ हो रही है। रामघाट पर शिप्रा नदी में डुबकी लगाने आए श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था हेतु संपूर्ण रामघाट पर होमगार्ड और एसडीआरएफ के लगभग 85 जवानों को मोटरबोट एवं अन्य आपदा उपकरणों के साथ तैनात किया गया है। सभी जवान तीन शिफ्टों में तैनात किया गए हैं, जिन्हें समय-समय पर प्रशिक्षित किया जाता है। इसके पश्चात ही रामघाट पर डूब की घटनाओं में कमी आई है। दरअसल, वर्ष 2022 में रामघाट पर डूब की अत्यधिक घटनाओं को देखते हुए जिला कमांडेंट द्वारा निर्णय लिया गया कि रामघाट पर इन घटनाओं को रोकने हेतु विभाग के द्वारा उच्च प्रशिक्षित एसडीआरएफ जवानों की तैनाती की। तब से अभी तक लगातार न्यूनतम 20 जवान एसडीआरएफ एवं 10 होमगार्ड के जवान शिप्रा के विभिन्न घाटों पर तैनात रहते हैं। जिसमें वर्ष 2024 में एसडीआरएफ एवं होमगार्ड टीम के द्वारा बगैर कोई डूब की घटना घटित हुई और रामघाट पर 356 श्रद्धालुओं को घाट पर डूबने से बचाया गया। वहीं इस वर्ष भी रामघाट पर अभी तक होमगार्ड एवं एसडीआरएफ टीम के द्वारा कुल 215 नागरिकों की जान बचाई गई। दुर्भाग्य से ही लगभग 25 लोगों की डूबने से मौत हुई। इस वर्ष बचाए गए 215 नागरिकों में से अधिकतर श्रद्धालु ऐसे थे जो घाट पर स्नान के समय गहराई का अंदाजा न होने एवं घाट पर फिसलन के कारण पानी में डूब रहे थे।

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