
कांगड़ा: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में एशिया की सबसे लंबी जिपलाइन बनाने की तैयारी की जा रही है. ये जिपलाइन 4.3 किलोमीटर की होगी. धर्मशाला के मैक्लोडगंज में नड्डी में गल्लू देवी मंदिर से मैगी प्वाइंट तक ये जिपलाइन बनाई जाएगी. प्राशसन इसके लिए फास्ट ट्रैक मोड पर काम कर रहा है. इस जिपलाइन को बहुत महत्वपूर्ण और खास माना जा रहा है.
चार किलोमीटर से अधिक की इस जिपलाइन को बनाने में पर्यावरण को रत्ती भर भी नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा. यानी इसको बनाने में एक भी पेड़ नहीं काटे जाएंगे. यही इस जिपलाइन की सबसे बड़ी खासियत बताई जा रही है. राज्य सरकार ने निर्देश दिए हैं कि इस परियोजना के लिए सभी प्रशासनिक और पर्यावरणीय औपचारिकताओं को निपटाया जाए. ताकि ये ड्रीम प्रोजेक्ट 36 महीनों यानी तीन साल के समय सीमा के भीतर पूरा हो सके.
ये जिपलाइन शून्य कार्बन उत्सर्जन और लो इकोलॉजिल फुटप्रिंट तकनीक के आधार पर डिजाइन किया गया है. ये जिपलाइन 7.41 करोड़ रुपये की लागत से सार्वजनिक और निजी यानी पीपीपी मोड के तहत बनाई जाएगी. जिपलाइन से नड्डी, बल गांव और गल्लू जैसे ग्रामीण इलाके सीधे इंटरनेशनल पर्यटन के नक्शे से जुड़ जाएंगे. परियोजना समय पर धरातल पर उतर जाए, इसलिए वन विभाग, राजस्व और लोक निर्माण विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा स्टेशनों के लिए जमीन का अंतिम चयन कर लिया गया है.
गैर-वन भूमि प्रमाण पत्र और संबंधित अनापत्ति प्रमाण पत्रों की प्रक्रिया अपने आखिरी चरण में है. जैसे ही कांगड़ा के उपायुक्त की ओर से अंतिम स्वीकृति प्राप्त होगी, वैसे ही इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार के परिवेश पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा. बता दें कि राज्य की सरकार द्वारा फैसला किया गया है कि कांगड़ा को राज्य की पर्यटन राजधानी के तौर पर विकसित किया जाएगा. इस योजना के तहत गग्गल एयरपोर्ट का विस्तार, कांगड़ा एरोसिटी का निर्माण और पोंग बांध में वाटर स्पोर्ट्स जैसी आधुनिक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है.
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