कोलकाता। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और पारंपरिक ‘घास पर जोड़ा फूल’ (Ghas par joda phool) चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे विवाद का असर चुनाव प्रचार सामग्री (Election campaign material) तैयार करने वाले कारोबारियों पर भी पड़ा है। हावड़ा के एक कारीगर ने रेजिनगर और नंदीग्राम विधानसभा उपचुनावों तथा आगामी नगर निकाय चुनावों को ध्यान में रखते हुए करीब 1.50 लाख टीएमसी झंडे पहले से तैयार कर लिए थे। अब चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद इन झंडों की बिक्री को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है।
चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी कर ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसके ‘फूल एवं घास’ वाले आरक्षित चुनाव चिन्ह को फिलहाल फ्रीज कर दिया। आयोग के मुताबिक, पार्टी में दो प्रतिद्वंद्वी गुट सामने आए हैं और दोनों ही मूल पार्टी नाम तथा चुनाव चिन्ह पर दावा कर रहे हैं। ऐसे में आगामी उपचुनावों के लिए दोनों गुटों को अलग नाम और चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में उतरने की व्यवस्था की गई है।
बोरियों में रखे हैं डेढ़ लाख झंडे
हावड़ा के उनसानी दक्षिण पाड़ा निवासी राजू हलदर चुनाव प्रचार सामग्री बनाने का काम करते हैं। चुनाव के दौरान उन्हें विभिन्न राजनीतिक दलों के झंडे बनाने के ऑर्डर मिलते हैं। टीएमसी के झंडों की मांग को देखते हुए उन्होंने इस बार रेजिनगर और नंदीग्राम उपचुनावों के साथ नगर निकाय चुनावों को ध्यान में रखकर बिना अग्रिम ऑर्डर के ही अलग-अलग आकार के करीब 1.50 लाख झंडे तैयार कर लिए थे।
राजू हलदर की वर्कशॉप में तैयार ये झंडे अब बोरियों में पैक रखे हैं। उनका कहना है कि राजनीतिक दलों के झंडों के अलावा उनकी वर्कशॉप में सालभर राष्ट्रीय और धार्मिक झंडे भी तैयार किए जाते हैं। इनकी आपूर्ति बंगाल के अलावा दूसरे राज्यों में भी होती है। लेकिन टीएमसी के नाम और पुराने चुनाव चिन्ह पर आयोग के अंतरिम आदेश के बाद तैयार माल की बिक्री को लेकर चिंता बढ़ गई है।
आयोग के अगले फैसले पर टिका माल का भविष्य
कारीगर के मुताबिक, यदि पुराने चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल नहीं हो सकता तो पहले से तैयार झंडों का क्या होगा, यह बड़ा सवाल है। फिलहाल इन झंडों को गोदाम में रखना पड़ा है और इसमें लगा पैसा अटक गया है। कारोबारियों और मजदूरों को उम्मीद है कि विवाद के समाधान के बाद स्थिति स्पष्ट होगी और तैयार सामग्री के इस्तेमाल या बिक्री का रास्ता साफ हो सकेगा।
ममता बनर्जी से जुड़ा रहा है ‘जोड़ा फूल’
तृणमूल कांग्रेस का ‘घास पर जोड़ा फूल’ चुनाव चिन्ह लंबे समय से पार्टी की पहचान रहा है। पार्टी के गठन के दौर में ममता बनर्जी ने इसे पार्टी की राजनीतिक पहचान के तौर पर अपनाया था। ‘तृणमूल’ शब्द का अर्थ घास की जड़ से जुड़ा है, इसलिए घास से उभरते दो फूलों को पार्टी की पहचान और जमीन से जुड़े लोगों के प्रतीक के तौर पर भी देखा जाता रहा है।
चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद अब दोनों प्रतिद्वंद्वी गुट मूल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल एवं घास’ चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर सकते। आयोग ने दोनों पक्षों से वैकल्पिक नाम और मुक्त चुनाव चिन्ह के विकल्प मांगे थे। बाद में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को अलग नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच हावड़ा के कारीगरों की नजर अब चुनाव आयोग के आगे के फैसलों और चुनावी गतिविधियों पर है। राजू हलदर की वर्कशॉप में तैयार करीब डेढ़ लाख झंडे फिलहाल इसी इंतजार में बोरियों में बंद हैं।
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