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ताजमहल में अब तय होगी पर्यटकों की सीमा, सुकून में होगा दीदार, भीड़ नियंत्रण के लिए IIT दिल्ली ने शुरू किया सर्वे

May 11, 2026

आगरा। विश्व प्रसिद्ध ताजमहल (Taj Mahal) में लगातार बढ़ रही पर्यटकों (Tourists) की भीड़ को नियंत्रित करने की दिशा में अब बड़ा कदम उठाया जा रहा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी की ‘केयरिंग कैपेसिटी’ तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसका मतलब है कि अब वैज्ञानिक तरीके से यह निर्धारित किया जाएगा कि एक समय में इन ऐतिहासिक स्मारकों में कितने पर्यटक सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से मौजूद रह सकते हैं।

इस पहल की शुरुआत ताजमहल से की गई है और इसके लिए आईआईटी दिल्ली की विशेषज्ञ टीम को जिम्मेदारी सौंपी गई है। हाल ही में IIT दिल्ली की तीन सदस्यीय टीम ने ताजमहल पहुंचकर विस्तृत सर्वे किया।

टिकट विंडो से मुख्य मकबरे तक हुआ निरीक्षण
टीम ने पूर्वी गेट स्थित टिकट विंडो से लेकर मुख्य मकबरे तक पूरे परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान टिकट लेने में लगने वाला समय, सुरक्षा जांच, टिकट स्कैनिंग और भीड़ के दौरान पर्यटकों की आवाजाही का अध्ययन किया गया।

रॉयल गेट, चमेली फर्श, प्रवेश और निकास मार्गों की व्यवस्था का भी बारीकी से आकलन किया गया। करीब ढाई घंटे तक चले इस सर्वे में भीड़ प्रबंधन से जुड़े हर पहलू पर जानकारी जुटाई गई। इस दौरान ASI के उत्तरी जोन के रीजनल डायरेक्टर वसंत कुमार स्वर्णकार से भी टीम ने चर्चा की। उनके कार्यकाल में मुख्य मकबरे पर भीड़ नियंत्रित करने के लिए 200 रुपये का अतिरिक्त टिकट लागू किया गया था।


  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बढ़ी कवायद
    ताजमहल संरक्षण को लेकर यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद तेज हुई है। कोर्ट के आदेश पर पर्यटन विभाग ने पहले स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, दिल्ली से विजन डॉक्यूमेंट तैयार कराया था, जिसे 2018-19 में अदालत में पेश किया गया।

    इसके बाद सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी (CEC) ने नवंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए ताजमहल समेत अन्य स्मारकों में बढ़ती भीड़ पर चिंता जताई थी। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया था कि स्मारकों की केयरिंग कैपेसिटी तय कर पर्यटकों की संख्या को वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रित किया जाए।

    पहले भी मिल चुके हैं सुझाव
    इससे पहले साल 2015 में नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) ने भी ताजमहल पर अध्ययन किया था। संस्थान ने सिफारिश की थी कि एक समय में अधिकतम 9 हजार पर्यटकों को ही ताजमहल परिसर में प्रवेश दिया जाए, जबकि हर घंटे 6 हजार से ज्यादा लोगों की एंट्री न हो। साथ ही डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड लगाने और “स्टेप टिकटिंग सिस्टम” लागू करने जैसे सुझाव भी दिए गए थे।

    पर्यटकों को मिलेगा बेहतर अनुभव
    ASI अब पहले चरण में ताजमहल की केयरिंग कैपेसिटी तय करेगा। इसके बाद आगरा किला और फतेहपुर सीकरी में भी यही व्यवस्था लागू की जाएगी। माना जा रहा है कि इससे ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण बेहतर होगा और पर्यटकों को भीड़भाड़ से राहत के साथ अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित अनुभव मिल सकेगा।

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