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गृह मंत्रालय के दो अफसर FCRA पंजीकरण के बदले रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार, 28 सितंबर को हुई कार्रवाई

September 30, 2026


नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय (Union Home Ministry) के दो अधिकारियों को विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (Foreign Contribution Regulation Act) यानी FCRA के तहत किसी संस्था का पंजीकरण (Registration) कराने और लाइसेंस के नवीनीकरण (License Renewal) में मदद करने के बदले रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। दोनों अधिकारियों को 28 सितंबर को दिल्ली में पकड़ा गया। कार्रवाई दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की स्पेशल सेल ने केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर की। गिरफ्तार अधिकारियों में एक वरिष्ठ लेखाकार (Senior Accountant) और दूसरा लेखाकार है। गृह मंत्रालय के अनुसार, इनमें से एक अधिकारी वर्तमान में मंत्रालय के विदेशी प्रभाग में तैनात है, जबकि दूसरा वेतन एवं लेखा कार्यालय में तैनात है। यह अधिकारी पहले विदेशी प्रभाग में भी सेवाएं दे चुका है। मामले के सामने आने के बाद गृह मंत्रालय ने पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लिया है और आगे की जांच जारी है।

गृह मंत्रालय के अनुसार, शुरुआती पूछताछ में सामने आया कि दोनों अधिकारी कथित तौर पर कुछ संस्थाओं के संपर्क में थे। आरोप है कि वे FCRA के तहत पंजीकरण कराने और लाइसेंस के नवीनीकरण में मदद करने के लिए रिश्वत की मांग करते थे। मंत्रालय ने कहा है कि मामले की आगे जांच की जा रही है और आरोपियों के खिलाफ उचित कानूनी तथा विभागीय कार्रवाई की जा रही है। मंत्रालय ने भ्रष्टाचार के प्रति अपनी कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति दोहराते हुए लोगों को सावधान रहने की अपील की है। मंत्रालय के मुताबिक FCRA से संबंधित सभी सेवाएं FCRA पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाती हैं। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि किसी भी FCRA सेवा में मदद के लिए किसी मध्यस्थ, एजेंट या अन्य व्यक्ति को अधिकृत नहीं किया गया है।

इस मामले के बीच FCRA से जुड़े विधायी प्रावधानों पर भी मंगलवार को बैठक हुई। गृह और विधि एवं न्याय मंत्रालय के अधिकारियों ने विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक, 2026 की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति के सामने विधेयक के प्रावधानों और प्रस्तावित बदलावों के कारणों की जानकारी दी। भाजपा सांसद संजय जायसवाल की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति विधेयक के प्रावधानों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है। बैठक में दोनों मंत्रालयों के अधिकारियों ने साल 2010 के मूल कानून में प्रस्तावित संशोधनों की जरूरत और उनके पीछे के कारणों के बारे में समिति को जानकारी दी। विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले संगठनों और गैर-सरकारी संगठनों के लिए FCRA के तहत पंजीकरण अनिवार्य है और गृह मंत्रालय इस संबंध में नोडल प्राधिकरण के तौर पर निगरानी करता है।


  • इस विधेयक पर आगे की बैठकों में भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष चल्ला श्रीनिवासुलु शेट्टी, सरकार के शीर्ष विधि अधिकारियों, वरिष्ठ वकीलों और अन्य विषय विशेषज्ञों के विचार भी समिति के सामने रखे जाने की संभावना है। विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक, 2026 को 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। विपक्षी दलों की मांग के बाद 12 अगस्त को इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया। कांग्रेस समेत कई दलों के नेताओं के साथ नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो और मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने भी विधेयक को लेकर चिंता व्यक्त की है। विपक्ष का आरोप है कि प्रस्तावित प्रावधानों से अल्पसंख्यक और ईसाई संस्थाओं को मिलने वाले विदेशी वित्तपोषण पर असर पड़ सकता है।

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