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दो रुपये की किताब ने बदल दिया Manoj Muntashir का जीवन, ऐसे बने कलम के ‘बाहुबली’

मुंबई। मनोज मुंतशिर! यह नाम आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। ‘तेरी मिट्टी’, ‘तेरी गलियां’, ‘कौन तुझे यूं प्यार करेगा’ जैसे गानों के लिए मशहूर मनोज मुंतशिर बॉलीवुड के जाने-माने गीतकार, डायलॉग राइटर और शायर हैं। मनोज मुंतशिर आज इसलिए चर्चा में हैं, क्योंकि उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल रहा है। जी हां, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शुक्रवार 30 सितंबर 2022 को दिल्ली में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का वितरण करने वाली हैं, जिसमें मनोज मुंतशिर को फिल्म ‘साइना’ के लिए बेस्ट लिरिक्स का अवॉर्ड मिलने वाला है।

इस तरह बदल दिया उपनाम
मनोज मुंतशिर का जन्म 27 फरवरी 1976 को यूपी के अमेठी के गौरीगंज में हुआ। माता-पिता ने बेटे का नाम मनोज शुक्ला रखा। मनोज शुक्ला ने हमेशा बड़े सपने देखे। मनोज मुंतशिर के पिता किसान थे और मां प्राइमरी टीचर। मां का वेतन सिर्फ 500 रुपये था, लेकिन मनोज को उन्होंने कॉन्वेंट में पढ़ाया। मनोज मुंतशिर को बचपन से ही लिखने का शौक था। सातवीं या आठवीं क्लास में थे तो दीवान-ए-गालिब किताब पढ़ी, लेकिन उर्दू नहीं आती थी, इसलिए उस किताब को समझना मुश्किल था। गाना लिखने के लिए उर्दू जानना जरूरी था।

वह पंडित परिवार से थे और उर्दू सीखना मुश्किल था। फिर एक दिन मस्जिद के नीचे से दो रुपए की उर्दू की किताब खरीदी, उसमें हिंदी के साथ उर्दू लिखी हुई थी। इसके बाद मनोज शुक्ला हमेशा के लिए मनोज मुंतशिर हो गए। मनोज मुंतशिर के पिता को जब पहली बार पता चला की उनके लाडले बेटे ने अपना नाम बदल लिया है तो सभी दुखी हुए। लेकिन जब खुद मनोज मुंतशिर ने ठान लिया कि उन्हें फिल्मों में गाने लिखने हैं तो उनके फैसले को खुद उनके पिताजी भी बदल न पाए।

700 रुपये लेकर आए थे मुंबई
अमेठी से मुंबई पहुंचने और यहां आकर अपना नाम स्थापित करने में मनोज मुंतशिर को काफी संघर्ष करना पड़ा है। एक बातचीत के दौरान उन्होंने बताया था, ‘मैं अमेठी से आता हूं। मेरे पापा ब्राह्मण और किसान हैं। साल में 6 महीने वो खेती करते हैं और 6 महीने हवन-शादी कराते हैं। उन्होंने अपनी जिंदगी में कभी भी मुंतशिर शब्द नहीं सुना था। जब मैंने उन्हें कहा कि मैं अपना सरनेम बदलकर मुंतशिर कर रहा हूं तो उन्होंने कहा क्या चाहिए? मैंने कहा 300 रुपये, मुंबई की ट्रेन का टिकट लेना है और लेखक बनने के अपने सपने को पूरा करना है। उन्होंने मुझे 700 रुपये दिए। वह निश्चिंत थे कि मैं फेल हो जाऊंगा और वापस आ जाऊंगा। लेकिन, आज मुंबई में मेरा अपना घर है।’

फुटपाथ पर बिताईं कई रातें
बता दें कि मनोज मुंतशिर ने वर्ष 1997 में इलाहाबाद आकाशवाणी में भी काम किया था, जहां उन्हें पहली पगार मिली 135 रुपये। लेकिन, सपना तो लेखकर बनने का था। उन्होंने 1999 में अनूप जलोटा के लिए उन्होंने भजन लिखा था और पहली बार 3000 रुपये मिले थे। मुंबई में फुटपाथ पर कई रात बिताने वाले मनोज ने साल 2005 में कौन बनेगा करोड़पति के लिए लिरिक्स लिखे। एक बातचीत में मनोज मुंतशिर ने कहा था, ‘स्टार टीवी के एक अधिकारी ने मेरा काम देखा था, एक दिन उन्होंने मुझे बुलाया और पूछा कि अमिताभ बच्चन से मिलोगे। वो मेरे संघर्ष के दिन थे, तो मुझे लगा कि मजाक हो रहा। फिर वो मुझे एक होटल ले गए, जहां मेरी मुलाकात अमिताभ बच्चन से हुई।’

बता दें कि इसके बाद उन्होंने केबीसी के लिए गीत लिखे। मनोज मुंतशिर ने प्रभास की ‘बाहुबली’ के लिए भी डायलॉग लिखे। इस फिल्म के लिए लिखे मनोज मुंतशिर के डायलॉग जैसे- ‘देवसेना को किसी ने हाथ लगाया तो समझो बाहुबली की तलवार को हाथ लगाया’ और ‘औरत पर हाथ डालने वाले का हाथ नहीं काटते, काटते हैं उसका गला’ खूब हिट हुए। मनोज मुंतशिर ने ही ‘केसरी’, ‘हाफ गर्लफ्रेंड’, ‘एमएस धोनी’, ‘नोटबुक’, ‘सनम रे’, ‘साइना’ जैसी फिल्मों के गीत लिख चुके हैं।

लग चुका है आरोप
गीतकार मनोज मुंतशिर विवादों का भी सामना कर चुके हैं। बीते साल उन पर कविता चुराने का आरोप लगा था। यह मुद्दा सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ। सोशल मीडिया पर मनोज मुंतशिर पर यह आरोप लगाया गया कि वर्ष 2019 में आई उनकी एक किताब ‘मेरी फितरत है मस्ताना’की एक कविता ‘मुझे कॉल करना’ किसी और के द्वारा लिखी गई है और उन्होंने इसका हिंदी अनुवाद करके अपनी किताब में छाप दिया है। इसके अलावा उन पर ‘तेरी मिट्टी’ गाने को भी कॉपी करने का आरोप लगाया गया। हालांकि इस पर मनोज मुंतशिर ने कहा था, ‘अगर ‘तेरी मिट्टी’ किसी गाने की कॉपी निकला तो वह हमेशा के लिए लिखना छोड़ देंगे।’ फिल्म ‘साइना’ 2021 में रिलीज हुई यह फिल्म बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल की बायोपिक है। इस फिल्म में परिणीति चोपड़ा ने साइना नेहवाल की भूमिका निभाई है।

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