
नई दिल्ली । महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) की एक संगठनात्मक बैठक के दौरान पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (UddhavThackeray) का कड़ा रुख चर्चा का विषय बन गया। ठाणे-कल्याण क्षेत्र के पदाधिकारियों की समीक्षा बैठक में उन्होंने नेताओं की आपसी गुटबाजी और पदों को लेकर चल रहे विवाद पर नाराजगी जाहिर की। बैठक के दौरान उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके (AbhijitDeepke) का उदाहरण देते हुए नेताओं से संगठन (Organization) और बड़े राजनीतिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही।
बताया गया कि यह बैठक कल्याण लोकसभा क्षेत्र में कुछ अनुभवी कार्यकर्ताओं को पार्टी से हटाए जाने के बाद उत्पन्न संगठनात्मक असंतोष की पृष्ठभूमि में आयोजित की गई थी। पुराने कार्यकर्ताओं और नए पदाधिकारियों के बीच नेतृत्व को लेकर मतभेद सामने आए, जो बैठक के दौरान तीखी बहस में बदल गए। इस दौरान कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे और संगठनात्मक स्थिति की समीक्षा की जा रही थी।
बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में पार्टी कार्यकर्ताओं को आपसी मतभेद छोड़कर बड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि जब देश में विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर आंदोलन हो रहे हैं, तब पार्टी के भीतर छोटे-छोटे पदों को लेकर विवाद संगठन को कमजोर करता है। इसी संदर्भ में उन्होंने अभिजीत दीपके के आंदोलन का उल्लेख करते हुए नेताओं से सक्रियता और एकजुटता का संदेश लेने की बात कही।
सूत्रों के अनुसार, ठाकरे की नाराजगी केवल बैठक तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने संगठन में अनुशासन बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका मानना था कि लगातार बढ़ती गुटबाजी का असर पार्टी की जमीनी मजबूती पर पड़ सकता है। बैठक के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई कि संगठन के भीतर अनुशासन कायम रखने के लिए नेतृत्व आगे कुछ सख्त कदम उठा सकता है।
रिपोर्टों के मुताबिक, हाल के दिनों में उद्धव ठाकरे और अभिजीत दीपके के बीच टेलीफोन पर बातचीत भी हुई थी। बताया गया कि इस बातचीत में ठाकरे ने आंदोलन को लेकर उन्हें शुभकामनाएं दीं और व्यक्तिगत स्तर पर भी हालचाल पूछा। साथ ही उन्हें मुंबई स्थित अपने आवास ‘मातोश्री’ आने का निमंत्रण भी दिया गया। हालांकि इस बातचीत को लेकर दोनों पक्षों की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
शिवसेना (यूबीटी) के लिए ठाणे और आसपास का क्षेत्र लंबे समय से राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। ऐसे में संगठन के भीतर बढ़ती गुटबाजी नेतृत्व के लिए चुनौती बन सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी तैयारियों को देखते हुए पार्टी नेतृत्व संगठनात्मक एकजुटता पर विशेष ध्यान दे रहा है। फिलहाल उद्धव ठाकरे की इस बैठक और नेताओं को दी गई नसीहत को संगठन में अनुशासन और एकता का संदेश माना जा रहा है।
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