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उद्धव ठाकरे ने शिवसेना गंवाने के बाद अपनी पार्टी में ट्रांसफर किए करोड़ों के फंड

मुम्बई (Mumbai)। एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के नेतृत्व वाले गुट के हाथों ‘शिवसेना’ (‘Shiv Sena’) गंवाने के बाद उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने करोड़ों रुपये का फंड अपनी पार्टी में ट्रांसफर (Fund transfer of crores of rupees) किया है। कहा जा रहा है कि ठाकरे ने शिवसेना के करोड़ों रुपये के पार्टी फंड को अपनी पार्टी ‘शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे’ (‘Shiv Sena Uddhav Balasaheb Thackeray’-UBT) के खाते में ट्रांसफर किया है। यह अमाउंट कितनी है इसको लेकर खुलासा नहीं हुआ है। उद्धव खेमे ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले समूह को ‘शिवसेना’ नाम और उसका चुनाव चिह्न ‘तीर-कमान’ आवंटित कर दिया। इसे उद्धव ठाकरे के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।


शिवसेना भवन गंवाने का डर
अब चुनाव आयोग के फैसले के बाद उद्धव ठाकरे के खेमे के नेताओं को डर है कि शिंदे गुट अब शिवसेना भवन, स्थानीय पार्टी कार्यालयों और पार्टी फंड पर भी अपना दावा पेश कर सकता है। शिवसेना के स्थानीय पार्टी कार्यालयों को पार्टी शाखाओं के रूप में भी जाना जाता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, शिवसेना पार्टी के फंड को ठाकरे गुट ने ट्रांसफर किया है। इसके लिए बैंक में नया खाता खोला गया और उसमें करोड़ों का पार्टी फंड ट्रांसफर किया गया।

सेना भवन शिवसेना की संपत्ति नहीं- उद्धव गुट
इससे पहले वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने चुनाव आयोग के फैसले को साजिश बताते हुए कहा था, “अगर वे हमारा प्रतीक चुरा सकते हैं तो कुछ और भी चुरा सकते हैं। वे कुछ भी कर सकते हैं, लेकिन यह लोगों को मंजूर नहीं होगा।” शिवसेना (यूबीटी) गुट की नेता विशाखा राउत ने दावा किया कि सेना भवन शिवसेना की संपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा, “यह शिवाई सेवा ट्रस्ट से संबंधित है, और मैं एक ट्रस्टी हूं। इसलिए, शिंदे समूह के भवन पर कब्जा करने का कोई सवाल ही नहीं है। कुछ शाखाएं भी इस ट्रस्ट द्वारा चलाई जाती हैं।”

सेना भवन पर कब्जा करने में कोई दिलचस्पी नहीं है: शिंदे गुट
कानूनी विशेषज्ञ और पूर्व महाधिवक्ता श्रीहरि अणे कहते हैं कि अगर सेना भवन का प्रबंधन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है, तो ट्रस्ट को नियंत्रित करने वाले अधिनियम के तहत ही उस विवाद का निपटारा किया जाएगा। उन्होंने कहा, “पार्टी कार्यालयों के स्वामित्व का कोई मतलब नहीं है, हालांकि उनका भावनात्मक और राजनीतिक मूल्य होता है।” ऐसी खबरें हैं कि शिंदे गुट के शिवसेना भवन पर कब्जा करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। इसके प्रवक्ता नरेश म्हस्के ने कहा, “लेकिन हम वे सभी चीजें चाहते हैं जो कानूनी रूप से हमें मिलनी चाहिएं।’ एक अन्य प्रवक्ता शीतल म्हात्रे ने कहा, “भवन पर दावा करने का फैसला शिंदे द्वारा लिया जाएगा। हमारी रुचि केवल प्रतीक पर थी।”

इस बीच, मुंबई पुलिस ने शुक्रवार को सेना भवन के आसपास चौकसी बढ़ा दी। शिंदे के एक करीबी नेता ने कहा, “ठाकरे समूह की मुख्य चिंताओं में से एक पार्टी फंड है जो यूबीटी (शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के लिए इस्तेमाल किया जाता है। वे इस बात से सावधान हैं कि हम उसे भी छीनने का प्रयास कर सकते हैं। तकनीकी रूप से, यह हमें मिल सकता है। लेकिन अंतिम फैसला आला अधिकारियों द्वारा लिया जाएगा।” गौरतलब है कि एकनाथ शिंदे और शिवसेना के कई विधायकों द्वारा उनके (उद्धव के) खिलाफ बगावत करने के बाद उद्धव ने पिछले साल जून में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

उद्धव के लिए क्यों झटका है आयोग का फैसला
चुनाव आयोग का फैसला इसलिए भी काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव अक्टूबर 2024 में होने हैं। उद्धव के दिवंगत पिता बाल ठाकरे द्वारा 1966 में स्थापित पार्टी के नियंत्रण से उन्हें (उद्धव को) वंचित करने का चुनाव आयोग का फैसला ऐसे समय में आया है, जब बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) और अन्य नगर निकायों के चुनाव भी होने हैं। मुंबई में नगर निकाय चुनाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बीएमसी दो दशकों से अधिक समय से शिवसेना का गढ़ रहा है।

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