
नई दिल्ली: मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर संसद जमकर हंगामा हुआ. हंगामे के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई. विपक्षी सांसद पेपर लीक पर चर्चा की मांग कर रहे थे. लोकसभा की कार्यवाही तो शुरू होते ही हंगामा होने लगा. विपक्षी सांसद नारेबाजी करने लगे. राज्यसभा में भी कुछ ऐसा ही हुआ.
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है. हम अपनी बात कहां रखे. उन्होंने माइक बंद करने का आरोप भी लगाया. खरगे ने सदन में कहा कि हमारे देश के हजारों छात्र पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं लेकिन इस सरकार ने उनके ऊपर लाठीचार्ज करवाया. उन्हें मारा-पीटा गया और उनके ऊपर आंसू गैस के गोले दागे गए. ये बहुत ही निंदनीय घटना है.
खरगे ने आगे कहा कि हम इस अन्याय और अत्याचार के खिलाफ सरकार से सदन में चर्चा करना चाहते थे, लेकिन एक शब्द बोलते ही माइक बंद कर दिया गया. क्या ये लोकतंत्र है? अगर लोकतंत्र में सरकार हमारी बात ही नहीं सुनना चाहती, तो फिर हम कहां जाएं? हम चाहते थे कि इस मुद्दे पर चर्चा हो, जिसके बाद गृह मंत्री एक स्टेटमेंट दें, लेकिन सरकार ने हमारा ही मुंह बंद करा दिया.
खरगे ने कहा कि आखिर प्रदर्शन कर रहे बच्चों पर लाठीचार्ज क्यों किया गया, उन्हें क्यों मारा-पीटा गया? अगर इन मुद्दों पर संसद में भी चर्चा न हो, तो कहां बात करें? ये सरकार खुद अराजकता क्रिएट कर रही है, लोगों को उकसा रही है, ताकि उन पर लाठीचार्ज करवाया जाए, उन्हें मार-पीटकर, डराकर जेल में डाला जाए. हम कल भी सदन में इन मुद्दों पर बात करना चाहते थे, लेकिन हमें मौका नहीं दिया गया.
ऊपर से हमें सदन से बाहर भी नहीं जाने दिया गया, जेल की तरह अंदर ही रखा गया. देश आज अराजकता की तरफ बढ़ रहा है, जिसे नरेंद्र मोदी और अमित शाह कंट्रोल नहीं करना चाहते हैं. हम ऐसे रवैये की कड़ी निंदा करते हैं.
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