
वॉशिंगटन. सात बार की लगातार नाकामी के बाद, आखिरकार अमेरिकी सीनेट (United States Senate) ने मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति (President) ट्रंप (onald Trump) के युद्ध अधिकारों (War Powers) को सीमित करने वाला एक अहम प्रस्ताव पास कर दिया है। यह प्रस्ताव खास तौर पर ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई को रोकने के लिए लाया गया है। सीनेट का यह कदम ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि अब राष्ट्रपति अपनी मर्जी से ईरान के खिलाफ युद्ध का ऐलान नहीं कर पाएंगे।
सीनेट में इस प्रस्ताव पर वोटिंग हुई। इस प्रस्ताव के पक्ष में 50 वोट पड़े, जबकि विरोध में 47 वोट आए। सबसे हैरानी की बात यह रही कि मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप की अपनी रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों (सीनेटरों) ने बगावत करते हुए विपक्षी पार्टी (डेमोक्रेट्स) का साथ दिया और प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया। जिन चार रिपब्लिकन नेताओं ने ट्रंप के खिलाफ जाकर वोट किया, उनके नाम सुसान कोलिन्स, लिसा मुर्कोव्स्की, रैंड पॉल और बिल कैसिडी हैं। सीबीएस न्यूज के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा इस प्रस्ताव को पास कराने का यह आठवां प्रयास था, जो अब जाकर सफल हुआ है।
सीनेट में पास हुए इस प्रस्ताव का असल मतलब क्या है?
इस प्रस्ताव को डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर टिम केन ने पेश किया था। इस प्रस्ताव का सीधा और साफ मतलब यह है कि मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप बिना संसद की मंजूरी के ईरान पर हमला नहीं कर सकते। प्रस्ताव में साफ लिखा है कि जब तक कांग्रेस (अमेरिकी संसद) की तरफ से आधिकारिक तौर पर युद्ध की घोषणा नहीं की जाती या सैन्य बल के इस्तेमाल की विशेष मंजूरी नहीं मिल जाती, तब तक राष्ट्रपति को अमेरिकी सेना को ईरान के खिलाफ किसी भी तरह की शत्रुता से दूर रखना होगा। यह कानून राष्ट्रपति की शक्तियों पर सीधा लगाम लगाता है।
डेमोक्रेटिक नेताओं ने इस जीत पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
इस प्रस्ताव के पास होने के बाद डेमोक्रेटिक नेताओं में भारी उत्साह है। कैलिफोर्निया के डेमोक्रेट सीनेटर एडम शिफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि सीनेट के डेमोक्रेट्स ने एक बार फिर इस ‘असंवैधानिक युद्ध’ को खत्म करने के लिए वोटिंग कराई है। उन्होंने रिपब्लिकन साथियों का धन्यवाद किया जिन्होंने संवैधानिक जिम्मेदारी निभाते हुए इस प्रस्ताव का समर्थन किया। वहीं, सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने भी इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि अमेरिकी जनता अंतहीन युद्धों पर अरबों डॉलर खर्च नहीं करना चाहती। उन्होंने कहा कि जनता चाहती है कि हम देश के बड़े संकटों को सुलझाएं और इस असंवैधानिक युद्ध को तुरंत खत्म करें।
मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर हमला क्यों रोका था?
सीनेट में यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच एक शांति समझौते पर बातचीत चल रही है। इससे पहले सोमवार को, ट्रंप ने खुद खुलासा किया था कि उन्होंने ईरान पर एक बड़ा ‘नियोजित हमला’ रोक दिया है। ट्रंप ने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ अकाउंट पर एक लंबी पोस्ट में बताया कि कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने उनसे इस हमले को टालने की खास अपील की थी। इन नेताओं का मानना था कि अभी गंभीर बातचीत चल रही है और एक अच्छा समझौता हो सकता है।
शांति समझौते की सबसे बड़ी शर्त क्या रखी गई है?
खाड़ी देशों के बड़े नेताओं की अपील के बाद ट्रंप ने मंगलवार को होने वाला हमला तो टाल दिया, लेकिन उन्होंने अपनी एक सबसे बड़ी शर्त भी दुनिया के सामने रख दी है। मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने बहुत ही साफ शब्दों में कहा है कि इस शांति समझौते में सबसे अहम बात यह होगी कि ‘ईरान के पास कोई परमाणु हथियार नहीं होगा’ ट्रंप ने बताया कि उन्होंने खाड़ी नेताओं के सम्मान में अपने युद्ध सचिव पीट हेगसेथ और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैनियल कैन को मंगलवार का हमला रोकने का सख्त निर्देश दिया है।
अगर बातचीत विफल हुई तो अमेरिका का अगला कदम क्या होगा?
भले ही अमेरिका ने अभी के लिए ईरान पर सैन्य कार्रवाई रोक दी है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। ट्रंप ने अपनी सेना को अलर्ट मोड पर रखा है। उन्होंने अपनी पोस्ट में साफ चेतावनी दी है कि उन्होंने अमेरिकी सेना को निर्देश दिया है कि अगर ईरान के साथ कोई स्वीकार्य समझौता नहीं हो पाता है, तो सेना एक पल के नोटिस पर ईरान के खिलाफ पूरी ताकत के साथ ‘बड़े पैमाने पर हमला’ (फुल स्केल असॉल्ट) करने के लिए पूरी तरह से तैयार रहे। यानी अगर शांति वार्ता फेल होती है, तो ईरान पर विनाशकारी हमला तय है।
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