
नई दिल्ली. अमेरिका (US) और ईरान (Iran) के बीच जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है. होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के करीब ईरान के बंदर अब्बास (Bandar Abbas) इलाके में अमेरिका की नई एयरस्ट्राइक (Airstrike) के बाद तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने करीब सात हफ्तों से चल रहे संघर्षविराम का उल्लंघन किया है और इससे क्षेत्र में शांति की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है.
ईरानी मीडिया के मुताबिक मंगलवार तड़के होरमोजगान प्रांत में कई धमाके सुनाई दिए. अमेरिका ने इन हमलों को “रक्षात्मक कार्रवाई” बताया और दावा किया कि उसने उन मिसाइल पोजिशन और नौकाओं को निशाना बनाया जो कथित तौर पर होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रही थीं.
इसी बीच ईरान ने जवाबी कार्रवाई का बड़ा दावा भी किया है. भारत स्थित ईरानी एंबेसी ने दावा किया, “हमने एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन मार गिराया, जबकि F-35 और RQ-4 को वापस मुड़कर भागना पड़ा. अब वह दौर खत्म हो चुका है जब पश्चिम एशिया डरकर चुप बैठ जाता था.” हालांकि अमेरिका की तरफ से अभी तक F-35 या ड्रोन को लेकर किसी नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इन दावों ने क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया है.
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि बड़े समझौते को लेकर बातचीत अभी जारी है और किसी नतीजे तक पहुंचने में कुछ दिन और लग सकते हैं. बताया जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक शुरुआती समझौते पर बातचीत हो रही है, जिसके तहत 30 दिन का फ्रेमवर्क बनाकर होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बहाल की जा सकती है और क्षेत्रीय संघर्ष कम किया जा सकता है.
लेकिन सबसे बड़ा विवाद ईरान के फ्रीज फंड को लेकर है. रिपोर्ट्स के मुताबिक तेहरान करीब 24 अरब डॉलर की फ्रीज की गई संपत्ति को रिलीज करने की मांग कर रहा है. यही मुद्दा फिलहाल समझौते की राह में सबसे बड़ी बाधा बन गया है.
दूसरी तरफ तेल बाजार में भी इस तनाव का सीधा असर दिखने लगा है. दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और LNG व्यापार का रास्ता होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है. लगातार तनाव के कारण यहां सामान्य ट्रैफिक अब भी बहाल नहीं हो पाया है. ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि पिछले 24 घंटों में 25 तेल टैंकर और कारोबारी जहाज ईरान की अनुमति के बाद स्ट्रेट से गुजरे.
तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भी तेज उछाल आया और तेल करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया. वैश्विक बाजारों को डर है कि अगर हालात और बिगड़े तो सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ सकता है. इस बीच ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने साफ कहा कि “अमेरिका और इजरायल विरोधी नारे इस्लामिक रिपब्लिक की पहचान बने रहेंगे.” वहीं इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल लेबनान में अपने सैन्य अभियान और तेज करेगा.
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