
मेक्सिको सिटी। वेनेजुएला (Venezuela) में आए विनाशकारी भूकंप (Earthquakes) ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में मृतकों की संख्या 2,200 के पार पहुंच गई है, जबकि 11,000 से ज्यादा लोग घायल हैं। इस मुश्किल घड़ी में मेक्सिको (Mexico) की मशहूर बचाव टीम ‘टोपोस’ (Topos Azteca) मदद के लिए वेनेजुएला पहुंच रही है। यह टीम मलबे में दबे लोगों को निकालने में माहिर मानी जाती है।
तबाही का मंजर और बढ़ती चुनौतियां
भूकंप के करीब एक हफ्ते बाद भी वेनेजुएला में हालात बेहद खराब हैं। सबसे ज्यादा असर ला गुआरा राज्य में हुआ है, जहां कई बहुमंजिला इमारतें और घर जमींदोज हो गए हैं। अंतरराष्ट्रीय बचाव टीमें दिन-रात मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रही हैं। हालांकि, समय बीतने के साथ अब जीवित बचे लोगों के मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है। मेक्सिको से रवाना हुए 39 वर्षीय स्वयंसेवक जर्मन बेलो अपने साथ बचाव उपकरणों के अलावा बड़ी संख्या में ‘बॉडी बैग’ भी ले जा रहे हैं, ताकि मृतकों के शवों को सम्मान के साथ निकाला जा सके।
कौन हैं ये ‘टोपोस’ और कैसे करते हैं काम?
‘टोपोस’ मेक्सिको का एक नागरिक बचाव संगठन है। इसकी शुरुआत 1985 में मेक्सिको सिटी में आए भीषण भूकंप के बाद हुई थी। स्पेनिश भाषा में ‘टोपोस’ का मतलब ‘छछूंदर’ (Moles) होता है। इस टीम को यह नाम इसलिए मिला क्योंकि इसके सदस्य मलबे के बीच बनी बेहद संकरी जगहों और छेदों में रेंगकर घुस जाते हैं। ये लोग थर्मल कैमरे और संवेदनशील माइक्रोफोन जैसे आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं ताकि मलबे के नीचे दबी हल्की सी आहट या शरीर की गर्मी को पहचाना जा सके।
खामोशी का संकेत और बचाव का तरीका
बचाव कार्य के दौरान यह टीम एक खास तकनीक अपनाती है। जब कोई बचावकर्मी हवा में मुट्ठी बंद करके हाथ उठाता है, तो इसका मतलब होता है ‘बिल्कुल खामोश हो जाएं’। यह संकेत मिलते ही वहां मौजूद अन्य लोग चुप हो जाते हैं। इस सन्नाटे में बचावकर्मी मलबे के नीचे कान लगाकर सुनते हैं कि कहीं से कोई आवाज या खटखटाहट तो नहीं आ रही। इसके बाद फावड़े और हथौड़ों की मदद से धीरे-धीरे मलबा हटाया जाता है ताकि मलबे के और ज्यादा गिरने का खतरा न रहे।
उम्मीद की एक आखिरी किरण
मेक्सिको सिटी के एयरपोर्ट पर एक भावुक पल देखने को मिला। जब वेनेजुएला के एक इंजीनियर डिएगो बेजरानो को पता चला कि जर्मन बेलो और उनकी टीम उनके देश जा रही है, तो वह रो पड़े। डिएगो का परिवार अभी भी वेनेजुएला की राजधानी कराकस में है। बेलो ने उन्हें गले लगाकर तसल्ली दी। बेलो पेशे से एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं और अपनी छोटी सी वर्कशॉप चलाते हैं, लेकिन आपदा के समय वह सब छोड़कर लोगों की जान बचाने निकल पड़ते हैं। उनका कहना है कि किसी दुखी इंसान को उम्मीद देना ही उनका सबसे बड़ा इनाम है।
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