
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल (West Bengal) की नंदीग्राम विधानसभा सीट (Nandigram Assembly seat) पर 6 अक्टूबर को होने वाला उपचुनाव मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Chief Minister Suvendu Adhikari) के लिए खास राजनीतिक महत्व रखता है। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनकी खाली की गई सीट पर पहला उपचुनाव है। चुनाव से पहले घटनाक्रम तेजी से बदले हैं—ममता बनर्जी खेमे की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस ले लिया, जिसके बाद ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन दिया। इसके कुछ घंटे बाद ही 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े पुराने हत्या मामले में मिलन प्रधान को गिरफ्तार कर लिया गया।
नंदीग्राम का महत्व केवल मौजूदा उपचुनाव तक सीमित नहीं है। शुभेंदु अधिकारी की राजनीतिक यात्रा में इस सीट की केंद्रीय भूमिका रही है और 2021 में उन्होंने यहीं से ममता बनर्जी को चुनाव हराया था। 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनाव जीता, लेकिन बाद में भवानीपुर सीट अपने पास रखकर नंदीग्राम से इस्तीफा दे दिया। इसी वजह से यहां उपचुनाव हो रहा है।
ममता खेमे के उम्मीदवार ने अचानक छोड़ा मैदान
नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी खेमे ने संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया था। नामांकन वापस लेने से पहले उनकी शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात हुई थी। इसके बाद उन्होंने चुनावी मैदान से हटने का फैसला किया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से नाम वापस लेने की कोई स्पष्ट वजह नहीं बताई है।
इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया। लेकिन कुछ ही घंटे बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने उन्हें 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े एक पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने लंबित वारंट का हवाला दिया है। ममता और कांग्रेस ने गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाए हैं, जबकि पुलिस कार्रवाई को लंबित मामले से जोड़कर देख रही है।
शुभेंदु ने दिवंगत सहयोगी की मां को उतारा
भाजपा ने नंदीग्राम से हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। वह शुभेंदु अधिकारी के दिवंगत सहयोगी और पूर्व निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की मां हैं। चंद्रनाथ रथ की 6 मई को हत्या कर दी गई थी और इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है। भाजपा के इस फैसले से उपचुनाव में चंद्रनाथ की हत्या का मुद्दा भी चुनावी चर्चा का हिस्सा बन गया है।
इस तरह नंदीग्राम में चुनावी मुकाबले के साथ व्यक्तिगत और राजनीतिक रिश्तों से जुड़े मुद्दे भी सामने आ रहे हैं। हालांकि हसीरानी रथ ही भाजपा की उम्मीदवार हैं; शुभेंदु अधिकारी स्वयं इस उपचुनाव में प्रत्याशी नहीं हैं।
नंदीग्राम से शुरू हुई थी अधिकारी-ममता की राजनीतिक दूरी
नंदीग्राम शुभेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी के राजनीतिक सफर का अहम पड़ाव रहा है। भूमि अधिग्रहण के विरोध में नंदीग्राम आंदोलन ने 2007 के बाद बंगाल की राजनीति को प्रभावित किया था। इसी आंदोलन के दौर में ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी एक ही राजनीतिक मोर्चे पर नजर आए थे।
बाद में दोनों के राजनीतिक रास्ते अलग हुए। शुभेंदु अधिकारी भाजपा में चले गए और 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम से ही ममता बनर्जी के खिलाफ मैदान में उतरे। उन्होंने ममता को हराया और इसके बाद बंगाल की राजनीति में उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हुई।
2026 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने नंदीग्राम से जीत हासिल की। इसके साथ ही उन्होंने भवानीपुर सीट भी जीती थी। बाद में भवानीपुर सीट अपने पास रखने के फैसले के कारण नंदीग्राम सीट खाली हुई और अब यहां उपचुनाव कराया जा रहा है।
6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर में मतदान
नंदीग्राम के साथ रेजीनगर विधानसभा सीट पर भी 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। दोनों सीटों पर अलग-अलग राजनीतिक समीकरणों के बीच मुकाबला हो रहा है। नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।
नंदीग्राम में चुनाव से पहले ममता खेमे के उम्मीदवार का नाम वापस लेना, कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन और उसके बाद उनकी गिरफ्तारी ने मुकाबले को और चर्चा में ला दिया है। वहीं भाजपा ने हसीरानी रथ को मैदान में उतारकर चंद्रनाथ रथ की हत्या से जुड़े मुद्दे को भी चुनावी विमर्श में जगह दी है।
अब इस उपचुनाव का परिणाम शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार के शुरुआती राजनीतिक दौर में नंदीग्राम के मतदाताओं के रुख का एक महत्वपूर्ण चुनावी संकेत होगा। हालांकि इसे सरकार के कामकाज पर सीधा जनमत मानना या न मानना राजनीतिक विश्लेषण का विषय रहेगा।
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