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पश्चिम बंगाल: दूसरे चरण में आज 147 सीटों पर मतदान… 40 सीटों पर अहम भूमिका में मतुआ समुदाय

April 29, 2026

कोलकाता। पश्चिम बंगाल चुनाव (West Bengal elections) के दूसरे दौर में राजधानी कोलकाता और आसपास की 142 सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान (Voting.) हो रहा है। इस दौर में कम से कम 40 सीटों पर मतुआ समुदाय (Matua community) निर्णायक स्थिति में है.इस दौर में जिन सीटों पर मतदान होना है वहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को मजबूत माना जाता है.

वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में इनमें से 123 सीटें जीत कर पार्टी ने सीटों की संख्या के लिहाज से नया रिकार्ड बनाया था.इस दौर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Chief Minister Mamata Banerjee) समेत पार्टी के कई दिग्गज नेताओं और मंत्रियों की साख दांव पर है.पिछली बार बीजेपी को इनमें से महज 18 सीटें मिली थी.लेकिन इस बार पार्टी यहां कम से कम 100 सीटों पर जीत के दावे कर रही है.पहले दौर में पुरुषों के मुकाबले महिला वोटरों का मतदान प्रतिशत दो फीसदी ज्यादा रहा था.इस बार भी उनकी भूमिका काफी अहम होने की संभावना है.


  • क्या हैं मतुआ समुदाय के मुद्दे
    पहले दौर की तरह ही इस दौर में भी एसआईआर के दौरान भारी तादाद में कटे वोटरों के नाम, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था की स्थिति, महिला सुरक्षा, सिंडीकेट राज, भ्रष्टाचार और सरकार के कथित घोटाले ही प्रमुख मुद्दा बन कर उभरे हैं.लेकिन इनके अलावा इस बार इसमें मतुआ समुदाय का समर्थन सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है.

    कोलकाता से सटे उत्तर 24-परगना जिले और उससे सटे नदिया जिले में बसा एक करोड़ से ज्यादा आबादी वाला मतुआ समुदाय पिछले कई चुनावों से कम से कम 40 सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता रहा है.पहले यह तबका पूरी तरह तृणमूल कांग्रेस के साथ था.लेकिन वर्ष 2019 से बीजेपी के प्रति इसका झुकाव बढ़ा है.वर्ष 2021 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव में भी इस समुदाय ने बीजेपी का समर्थन किया था.फिलहाल इस समुदाय का एक गुट बीजेपी के साथ और दूसरा तृणमूल के साथ.मतदाता सूची में कितने हो पाए शामिल इस समुदाय का समर्थन हासिल करने के लिए केंद्र सरकार ने नागरिकता अधिनियम के तहत इन लोगों को नागरिकता देने का भरोसा दिया था.

    बीते साल के आखिर में शुरू एसआईआर के दौरान इनको भरोसा दिया गया था कि किसी का नाम मतदाता सूची से नहीं कटेगा.लेकिन अब तस्वीर बदली है.नागरिकता अधिनियम की धीमी प्रक्रिया के कारण अब तक महज पांच हजार लोगों को ही नागरिकता मिल सकी है.जरूरी दस्तावेज नहीं होने के कारण एसआईआर के दौरान इस समुदाय के लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से कट गए हैं.इससे उनमें भविष्य को लेकर आशंका पैदा हो गई है.मतदाता सूची से नाम कटने के कारण समुदाय के लोग आतंक में दिन काट रहे हैं.

    उत्तर 24-परगना जिले के ठाकुरनगर में रहने वाले सूरज मंडल डीडब्ल्यू से कहते हैं, “मेरा नाम तो मतदाता सूची में है लेकिन मेरे माता-पिता का नहीं.ऐसे में हम अपने भविष्य को लेकर आशंकित हैं” वो बताते हैं कि हमें नागरिकता कानून के तहत नागरिकता देने का वादा किया था और हमने वर्ष 2021 और 2024 के चुनाव में मतदाता भी किया था.लेकिन इस बार माता-पिता का नाम सूची से गायब है.बांग्लादेश से सटे बनगांव इलाके में रहने वाले विश्वजीत विश्वास डीडब्ल्यू को बताते हैं, “वर्ष 1992 में हिंसा के कारण मेरे माता-पिता बांग्लादेश से आकर यहां बसे थे.मेरा जन्म यहीं हुआ है.हम नागरिकता की उम्मीद में बीजेपी का समर्थन करते रहे हैं.लेकिन इस बार मेरे परिवार का नाम सूची से कट गया है.पता नहीं आगे हमारा क्या होगा?”

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