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जनगणना जातिगत हो या ना हो, सरकार का फैसला… SC ने खारिज की याचिका

May 20, 2026

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को जातिगत जनगणना के खिलाफ याचिका को खारिज कर दिया है. शीर्ष अदालत ने कहा कि जातिगत जनगणना नीतिगत मामला है. इसमें हम दखल नहीं दे सकते. CJI सूर्यकांत ने कहा कि जनगणना जातिगत हो या ना हो, यह सरकार का फैसला है. कोर्ट ने ये भी कहा कि सरकार को ओबीसी की संख्या पता होनी चाहिए. सरकार को यह जानना होगा कि पिछड़े वर्ग में कितने लोग हैं. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने यह फैसला सुनाया.

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि कास्ट डेटा का गलत इस्तेमाल हो सकता है. सरकार के पास पहले से ही काफी आंकड़े हैं, इसलिए नई जाति गणना की कोई जरूरत नहीं है. इस पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा कि सरकार के लिए यह जानना जरूरी है कि देश में कितने लोग पिछड़े वर्ग के हैं, ताकि उनके लिए सही योजनाएं बनाई जा सकें. उन्होंने कहा कि कोर्ट सरकार के इन नीतिगत फैसलों में तब तक दखल नहीं दे सकता जब तक वे कानून के खिलाफ न हों. इसके बाद कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया.


  • भारत में जनगणना 2027 का पहला चरण 1 अप्रैल से शुरू हुआ है. कोविड के कारण पांच साल की देरी के बाद, यह जनगणना दो चरणों में डिजिटल माध्यम से की जा रही है. हाउस लिस्टिंग और घरों की गणना 16 अप्रैल से 15 मई तक चली. पहले चरण में घर-संपत्ति की जानकारी ली गई जबकि दूसरे चरण में परिवार के प्रत्येक सदस्य की जानकारी ली जाएगी. जनगणना का दूसरा चरण 2027 से शुरू होगा. जनगणना के पहले चरण की शुरुआत फिलहाल 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में की गई है. इनमें अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा, सिक्किम और दिल्ली के एनडीएमसी व दिल्ली कैंट क्षेत्र शामिल हैं.

    जनगणना का पहला चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 तक चलेगा. प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को अपने-अपने क्षेत्र में 30 दिनों के भीतर सर्वेक्षण पूरा करना होगा. विशेष बात यह है कि पहली बार घर-घर सर्वेक्षण करने से पहले 15 दिन की स्व-गणना कराने का समय दिया गया है, जिससे कि देश का कोई भी सामान्य नागरिक अपनी सुविधा अनुसार पहले ही जानकारी दर्ज कर सकें. बता दें कि यह देश की पहली पूर्ण रूप से डिजिटल जनगणना है, जिसे लोग स्व-गणना पोर्टल के माध्यम से भी भर सकेंगे.

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