img-fluid

केरल में क्यों बढ़ा निपाह का खतरा? पिनाराई विजयन के दामाद और स्वास्थय मंत्री के छिड़ी जुबानी जंग

June 22, 2026

तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा में सोमवार को संक्रामक बीमारियों के फैलने पर हुई बहस जल्द ही दो प्रमुख राजनीतिक उत्तराधिकारियों के बीच तीखे राजनीतिक टकराव में बदल गई। दरअसल, निपाह वायरस को लेकर हुई बहस के दौरान माकपा विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के दामाद मोहम्मद रियास और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री के. करुणाकरण के बेटे के. मुरलीधरन ने सरकार द्वारा स्थिति को संभालने के तरीके पर एक-दूसरे पर कड़े आरोप लगाए। बता दें कि रियास ने राज्य में संक्रामक बीमारी की स्थिति पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया। हालांकि, स्पीकर ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया और कहा कि इस मुद्दे पर आपातकालीन चर्चा की आवश्यकता नहीं है।

इस बहस ने केरल की राजनीति की दो पीढ़ियों को आमने-सामने ला दिया। रियास वामपंथी नेतृत्व की विरासत का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री के. करुणाकरण के बेटे मुरलीधरन सत्ता पक्ष की ओर से सरकार का बचाव कर रहे थे। रियास ने आरोप लगाया कि केरल का चर्चित स्वास्थ्य मॉडल मुश्किल दौर से गुजर रहा है और स्वास्थ्य विभाग में तालमेल की कमी है। उन्होंने दावा किया कि चार जिलों में जिला चिकित्सा अधिकारी नहीं हैं और कोझिकोड में पर्याप्त चिकित्सा नेतृत्व की कमी है, जहां पहले निपाह के मामले सामने आ चुके हैं।


  • रियास ने पूछा, ‘क्या सरकार कोझिकोड के लिए एक भी चिकित्सा अधिकारी उपलब्ध नहीं करा सकी?’ उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग बीमारी की रोकथाम को मजबूत करने के बजाय तबादलों और नियुक्तियों में व्यस्त था। रियास ने दावा किया कि निपाह से संबंधित दवाएं बीमारी की सूचना मिलने के पांच दिन बाद राज्य में पहुंचीं। वह भी तब जब विपक्ष ने इस मुद्दे को उठाया।

    बहस के दौरान स्वास्थ्य मंत्री पर निशाना साधते हुए रियास ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में वायरस के फैसले से ज्यादा वहां तैनात एक अधिकारी (स्वास्थ्य सेवा निदेशक, जिनका अब तबादला हो चुका है) के तबादले की चिंता थी।

    विपक्ष के इन आरोपों को खारिज करते हुए स्वास्थय मंत्री मुरलीधरन ने कहा कि राज्य सरकार ने तेजी से कार्रवाई की और निपाह के इलाज के लिए आवश्यक दवाएं 24 घंटे के भीतर विदेश से मंगवाई गईं। उन्होंने कहा कि केरल में निपाह का केवल एक मामला सामने आया है और भारत में कहीं भी इबोला का कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है। विभागों के बीच बेहतर समन्वय और स्वास्थ्य व खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के संयुक्त निरीक्षण के जरिए राज्य में बीमारी की रोकथाम के लिए मजबूत व्यवस्था मौजूद है।

    पिछली सरकार के कार्यकाल पर तंज कसते हुए मुरलीधरन ने कहा कि सरकार पर पिछले 10 वर्षों की ‘रील्स’ और पिछले पांच वर्षों में ‘वीणा बजाने’ का बोझ है। यह टिप्पणी उन्होंने रियास पर निशाना साधते हुए की, जिन्हें कांग्रेस नेतृत्व वाले UDF ने मंत्री रहते हुए सोशल मीडिया पर रील्स बनाने और पोस्ट करने को लेकर घेरा था। साथ ही उन्होंने पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज पर भी कटाक्ष किया।

    इस दौरान मुरलीधरन ने सदन को आश्वस्त किया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में खाली पड़े पद जल्द भरे जाएंगे। जनता को घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि सरकार ने सभी आवश्यक एहतियाती कदम उठाए हैं।

    Share:

  • 159 दवाएं सैंपल क्वालिटी टेस्ट में फेल, सेंट्रल ड्रग्स लैबोरेटरीज की रिपोर्ट में खुलासा

    Mon Jun 22 , 2026
    नई दिल्ली। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि सेंट्रल ड्रग्स लैबोरेटरीज ने मई के लिए अपनी मासिक ड्रग अलर्ट रिपोर्ट में अलग-अलग कंपनियों द्वारा बनाई गई 46 दवाओं के सैंपल को मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाया। अधिकारियों ने बताया कि इसके अलावा राज्य स्तरीय दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं ने 113 दवाओं के […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved