नई दिल्ली। देश-दुनिया में बढ़ती भीषण गर्मी (Scorching heat) और लगातार पड़ रही हीटवेव (Heatwave) के बीच चीन में इस्तेमाल की जा रही एक नई कूलिंग तकनीक चर्चा का विषय बनी हुई है। कई रिहायशी और व्यावसायिक इमारतों की छतों पर रूफटॉप मिस्ट कूलिंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि यह तकनीक आसपास का तापमान कुछ ही मिनटों में 5 से 8 डिग्री सेल्सियस तक कम कर सकती है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रणाली खुले स्थानों में कम ऊर्जा खर्च कर गर्मी से राहत देने का प्रभावी विकल्प हो सकती है।
हीटवेव से निपटने की नई कोशिश
जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया के कई हिस्सों में हीटवेव पहले की तुलना में अधिक तीव्र और लंबी अवधि की हो गई है। बड़े शहरों में कंक्रीट की इमारतें, डामर की सड़कें और हरियाली की कमी ‘अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट’ को बढ़ाती हैं, जिससे दिन के साथ रात में भी तापमान ऊंचा बना रहता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिक कम ऊर्जा वाली शीतलन तकनीकों पर काम कर रहे हैं।
चीन में अपनाया जा रहा यह सिस्टम कैफे, रेस्तरां, टैरेस, गार्डन, वेयरहाउस, बस स्टॉप और अन्य खुले स्थानों पर लगाया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसी पूरे भवन को एयर कंडीशन करना नहीं, बल्कि आसपास की हवा का तापमान कुछ डिग्री तक कम करना है, ताकि लोगों को गर्मी से राहत मिल सके।
कैसे काम करती है यह तकनीक?
मिस्ट कूलिंग सिस्टम इवैपोरेटिव कूलिंग (Evaporative Cooling) के सिद्धांत पर काम करता है। इसमें हाई-प्रेशर नोजल हवा में पानी की बेहद महीन बूंदों का छिड़काव करते हैं। ये बूंदें जमीन तक पहुंचने से पहले ही भाप में बदलने लगती हैं।
भाप बनने की प्रक्रिया के लिए पानी आसपास की हवा से गर्मी अवशोषित करता है। परिणामस्वरूप हवा का तापमान कम होने लगता है और वातावरण अपेक्षाकृत ठंडा महसूस होता है। यही सिद्धांत मानव शरीर में भी काम करता है, जहां पसीना सूखने के दौरान शरीर की गर्मी को बाहर निकाल देता है।
क्या यह एयर कंडीशनर का विकल्प है?
विशेषज्ञों के अनुसार, मिस्ट कूलिंग सिस्टम पारंपरिक एयर कंडीशनर का विकल्प नहीं है। एसी बंद कमरों में रेफ्रिजरेंट गैस और कंप्रेसर की मदद से तापमान नियंत्रित करता है, जबकि मिस्ट कूलिंग सिस्टम केवल खुले या अर्ध-खुले स्थानों में हवा को कुछ डिग्री तक ठंडा करता है। इसलिए इसे आउटडोर कूलिंग तकनीक माना जाता है।
क्या सचमुच 5 से 8 डिग्री तक घट सकता है तापमान?
सोशल मीडिया पर तापमान 5 से 8 डिग्री सेल्सियस तक कम होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इसका प्रभाव स्थानीय मौसम और हवा में मौजूद नमी पर निर्भर करता है। यदि वातावरण शुष्क हो तो पानी तेजी से भाप बनता है और कूलिंग अधिक प्रभावी होती है। वहीं अधिक आर्द्रता वाले क्षेत्रों में यह प्रक्रिया धीमी होने से तापमान में कमी भी सीमित रह सकती है।
भविष्य में बढ़ सकता है इस्तेमाल
विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से गर्म होते शहरों और बढ़ते अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट के बीच मिस्ट कूलिंग सिस्टम सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को राहत पहुंचाने में उपयोगी साबित हो सकता है। यह पारंपरिक एयर कंडीशनिंग की तुलना में कम बिजली की खपत करता है और खुले क्षेत्रों के लिए अधिक व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है।
हालांकि यह तकनीक एयर कंडीशनर का पूर्ण विकल्प नहीं है, लेकिन हीटवेव से प्रभावित इलाकों में तापमान कम करने का एक वैज्ञानिक और ऊर्जा-कुशल उपाय जरूर मानी जा रही है। स्थानीय जलवायु और आवश्यकताओं के अनुरूप इसका उपयोग भविष्य में शहरी गर्मी से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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