नई दिल्ली। रात के साफ आसमान में चमकते तारे और दूरस्थ आकाशगंगाओं (Galaxies) का दृश्य आने वाले समय में बदल सकता है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी (Scientists have warned) दी है कि पृथ्वी की निचली कक्षा में लाखों नए उपग्रह और विशाल अंतरिक्ष दर्पण भेजने की प्रस्तावित योजनाएं खगोलीय अनुसंधान के साथ-साथ प्राकृतिक रात्रि आकाश के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती हैं। उनका कहना है कि यदि इन परियोजनाओं पर प्रभावी वैश्विक नियंत्रण नहीं लगाया गया, तो भविष्य में ब्रह्मांड के अध्ययन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
यूरोपियन सदर्न ऑब्जर्वेटरी (ESO) के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन के निष्कर्ष प्रतिष्ठित शोध पत्रिका Astronomy & Astrophysics में प्रकाशित हुए हैं।
अध्ययन के अनुसार, पृथ्वी की निचली कक्षा में किसी भी समय अधिकतम लगभग एक लाख अपेक्षाकृत कम चमक वाले उपग्रह ही होने चाहिए। वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे अधिक संख्या होने पर खगोलीय वेधशालाओं के कामकाज पर गंभीर असर पड़ने लगेगा।
इसके विपरीत, विभिन्न अंतरिक्ष कंपनियों और संस्थानों की प्रस्तावित योजनाओं में भविष्य में करीब 17 लाख उपग्रहों और अंतरिक्ष दर्पणों को कक्षा में स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। यह संख्या वैज्ञानिकों द्वारा सुझाई गई सुरक्षित सीमा से लगभग 17 गुना अधिक है।
रिपोर्ट के मुताबिक यह चिंता पहली बार वर्ष 2019 में सामने आई, जब स्पेसएक्स ने अपनी स्टारलिंक इंटरनेट सेवा के शुरुआती उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे। लंबी एक्सपोजर वाली खगोलीय तस्वीरों में उपग्रहों की चमकदार लकीरें दिखाई देने लगीं, जिससे वैज्ञानिकों के लिए सटीक अवलोकन करना मुश्किल होने लगा।
उस समय पृथ्वी की कक्षा में लगभग 2,000 सक्रिय उपग्रह मौजूद थे। अब यह संख्या बढ़कर 14,000 से अधिक हो चुकी है। यदि निष्क्रिय उपग्रहों और अंतरिक्ष मलबे को भी शामिल किया जाए तो कक्षा में मौजूद कृत्रिम वस्तुओं की संख्या लगभग 32,000 तक पहुंच चुकी है।
ईएसओ के खगोलशास्त्री ओलिवियर हैनो ने पिछले तीन दशकों के अनुभव और कंप्यूटर सिमुलेशन के आधार पर अध्ययन किया। उनके अनुसार, यदि उपग्रह सामान्य आंखों से दिखाई न दें, तब भी उनकी संख्या एक लाख के आसपास पहुंचने पर वेधशालाओं को होने वाला नुकसान मौसम या तकनीकी खराबी से होने वाले सामान्य नुकसान के बराबर या उससे अधिक हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि उपग्रहों की संख्या 50 हजार के आसपास सीमित रखी जाए तो वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए स्थिति कहीं अधिक अनुकूल रहेगी।
अध्ययन में स्पेसएक्स की उस प्रस्तावित योजना का भी विश्लेषण किया गया है, जिसमें भविष्य में अंतरिक्ष आधारित डाटा सेंटर विकसित करने के लिए लगभग 10 लाख अतिरिक्त उपग्रह भेजने की बात कही गई है।
सिमुलेशन के अनुसार, यदि यह योजना लागू होती है तो चिली स्थित ईएसओ की वेरी लार्ज टेलीस्कोप (VLT) से अंधेरा होने के दो घंटे बाद ली गई एक तस्वीर में दर्जनों उपग्रहों की चमकीली लकीरें दिखाई देंगी। इससे तस्वीर का लगभग 28 प्रतिशत हिस्सा वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए अनुपयोगी हो सकता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि उपग्रहों की संख्या इसी गति से बढ़ती रही, तो दूरस्थ आकाशगंगाओं, पृथ्वी जैसे संभावित ग्रहों और ब्रह्मांड की शुरुआती संरचना से जुड़े महत्वपूर्ण अनुसंधानों में बड़ी बाधाएं उत्पन्न होंगी। उनका मानना है कि अंतरिक्ष गतिविधियों के विस्तार के साथ वैज्ञानिक अनुसंधान और रात्रि आकाश की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने के लिए वैश्विक स्तर पर स्पष्ट नियम और सीमाएं तय करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
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