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अपर कलेक्टर बनकर युवती ने जिला कोर्ट के ड्राइवर से ठगे ढाई लाख

June 10, 2026

  • सरकारी जमीन निजी कराने का दिया झांसा, फर्जी खसरा-रजिस्ट्री दिखाकर वसूले रुपए, तीन साल बाद जनसुनवाई में पहुंचा पीडि़त

इन्दौैर। कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई में मंगलवार को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने प्रशासनिक अधिकारियों को भी चौंका दिया। जिला न्यायालय में वाहन चालक के रूप में पदस्थ आवेदक ने शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि एक युवती ने खुद को अपर कलेक्टर बताकर उससे ढाई लाख रुपए की ठगी कर ली। युवती ने सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जमीन को निजी नाम पर दर्ज कराने का भरोसा दिलाया था।

फर्जी अधिकारी बनकर आम जनता को लूटने का एक और मामला कलेक्टर कार्यालय में अपर कलेक्टर रोशन राय के समक्ष पहुंचा तो अधिकारी भी फोटो और फर्जी दस्तावेज देखकर चकित रह गए। अपनी व्यथा सुनाते हुए पीडि़त रूपेश जोशी ने बताया कि उसकी एक संपत्ति राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है। नामांतरण कराने के प्रयास के दौरान उसकी मुलाकात बाणगंगा क्षेत्र में रहने वाली एक युवती से हुई। क्षेत्र में उसका स्वागत-सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें उसे अपर कलेक्टर बताया गया।


  • सोशल मीडिया पर सरकारी वाहन के सामने खिंचवाई गई तस्वीरें और स्थानीय प्रचार देखकर रूपेश को भी विश्वास हो गया कि युवती प्रशासनिक अधिकारी है। रूपेश का आरोप है कि युवती ने भरोसा दिलाया कि कलेक्टर कार्यालय से जुड़े किसी भी काम को वह आसानी से करा सकती है। इस पर उसने जमीन से जुड़े दस्तावेज और खसरे की प्रतियां उसे सौंप दीं। कुछ दिन बाद युवती ने व्हाट्सऐप पर रजिस्ट्री, नगर निगम की रसीद और संशोधित खसरे की प्रतियां भेजीं, जिनमें संपत्ति उसके परिजन के नाम दर्ज दिखाई गई।

    3 साल में भी नहीं हुई कार्रवाई
    25 लाख रुपए की मांग के बाद रूपेश को ठगी का एहसास हुआ। उसने अपने पैसे वापस मांगे, लेकिन युवती ने लौटाने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसने थाना लसूडिय़ा में शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर कलेक्टर जनसुनवाई में न्याय की गुहार लगाई है। अपर कलेक्टर रोशन राय ने बताया कि शिकायत के माध्यम से मामला संज्ञान में आया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार घटना करीब तीन वर्ष पुरानी है। इसके बावजूद शिकायत की गंभीरता को देखते हुए थाना लसूडिय़ा को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र भेजा जा रहा है।

    दस्तावेज देने से पहले मांगे पांच लाख
    दस्तावेज देखकर रूपेश ने उनकी मूल प्रति मांगी तो युवती ने पांच लाख रुपए की मांग कर दी। सौदेबाजी के बाद ढाई लाख रुपए में बात तय हुई और उसने राशि दे दी। बाद में जब दस्तावेजों की जांच कराई गई तो वे पूरी तरह फर्जी निकले। रूपेश का आरोप है कि जब उसने आपत्ति जताई तो युवती ने असली दस्तावेज दिलाने के नाम पर 25 लाख रुपए और मांग लिए।

    पहले भी सामने आ चुके हैं फर्जी अफसरों के मामले
    कलेक्टर कार्यालय में इससे पहले भी फर्जी एसडीएम बनकर लोगों से ठगी करने का मामला सामने आ चुका है। उस मामले में एक युवती ने एसडीएम कार्यालय तक में पहुंच बनाकर लोगों को झांसा दिया था। अब अपर कलेक्टर की पहचान का इस्तेमाल कर ठगी किए जाने का मामला अधिकारियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। आशंका जताई जा रही है कि युवती ने इसी तरह अन्य लोगों को भी निशाना बनाया होगा। प्रशासनिक स्तर पर जांच आगे बढऩे के बाद और पीडि़त सामने आ सकते हैं।

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