
इंदौर। पुलिस, प्रशासन, निगम, प्राधिकरण से लेकर सभी सरकारी महकमे अपने दस्तावेजों को सुरक्षित और संरक्षित रखने के लिए डिजिटल कर रहे हैं। प्राधिकरण और निगम के भी लाखों दस्तावेज अभी तक डिजिटल किए जा चुके हैं, तो दूसरी तरफ राष्ट्रीय भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण का कार्यक्रम भी केन्द्र सरकार द्वारा शुरू करवाया गया है, जिसके तीसरे चरण में इंदौर सहित प्रदेशभर के 15 करोड़ से अधिक जमीनी दस्तावेज-रिकॉर्डों का डिजिटाइजेशन करवाया जा रहा है।
वर्ष 2008 में शुरू हुए राष्ट्रीय भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम को 1 अप्रैल 2016 से डीआईएलआरएमपी के रूप में पुनर्गठित किया गया था। इसके तहत मॉडर्न रिकॉर्ड रूम (एमआरआर) के अंतर्गत पुराने अभिलेखों के डिजिटाइजेशन की रूपरेखा तैयार की गई। योजना के फेज-1 (2013-2020) में लगभग 3,18,82,222 दस्तावेजों और फेज-2 (2021-22) में लगभग 2,39,24,462 दस्तावेजों की स्कैनिंग का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। अब फेज-3 के तहत 15 करोड़ रिकॉड्र्स के डिजिटाइजेशन का कार्य किया जा रहा है। परियोजना में जिला स्तर पर अत्याधुनिक स्कैनिंग केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।
दस्तावेजों की सुरक्षित स्कैनिंग, मेटा-डाटा एंट्री और भोपाल में डीबीईएस आधारित डबल-बाइंड डेटा एंट्री की व्यवस्था की गई है। आंकड़ों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित क्षेत्र के पटवारी द्वारा ऑनलाइन गुणवत्ता परीक्षण किया जाएगा। अंतिम रूप से सत्यापित रिकॉर्ड ‘भूलेख पोर्टल’ पर ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना के प्रथम चरण में जबलपुर एवं नर्मदापुरम संभाग के 12 जिलों में लगभग 2.70 करोड़ दस्तावेजों की शत-प्रतिशत स्कैनिंग पूरी कर ली गई है। इन जिलों में डेटा एंट्री का कार्य निरंतर जारी है। दूसरे चरण में भोपाल एवं सागर संभाग के 11 जिलों में जुलाई 2026 से कार्य प्रारंभ किया जाएगा। इसके लिए संबंधित जिलों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। भू-अभिलेखों के डिजिटाइजेशन से राजस्व व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved