
उज्जैन। बिजली कंपनी हर साल दावा करती है कि उपभोक्ताओं के यहां रीडिंग बिल ही भेजे जाएँगे, लेकिन उज्जैन में यह दावे फिसड्डी साबित हो रहे हैं। यहाँ 2 हजार से अधिक उपभोक्ताओं को लंबे समय एवरेज बिल ही भेजे जा रहे है। जिसका सीधा असर उनकी जेब पर पड़ रहा हैं।
उल्लेखनीय है कि उज्जैन शहर में बिजली के तकरीबन एक लाख घरेलू उपभोक्ता है, 9 झोन के माध्यम से बिजली व्यवस्था संचालित की जाती है। हर झोन पर एवरेज बिलिंग कि शिकायतें आ रही हैं। टोल फ्री 1912 से लेकर कंपनी मुख्यालय तक के अधिकारियों के पास शिकायतों का समाधान नहीं हो पा रहा हैं। जबकि इस संबंध में बिजली कंपनी के एमडी ने इसके लिए मुख्यालय अधिकारियों को सख्त लहजे में कहा कि उपभोक्ता परेशान नहीं होना चाहिए और एवरेज बिलिंग की शिकायत बंद होनी चाहिए। उज्जैन शहर में लगभग 1 लाख 40 हजार घरेलू व व्यवसायिक बिजली के उपभोक्ता हैं। इन उपभोक्ताओं के यहाँ मीटर रीडिंग के लिए 100 से अधिक मीटर रीडर काम कर रहे हैं। बावजूद लगभग 5 हजार उपभोक्ताओं की मीटर रीडर घर बैठे ही अंदाज से रीडिंग लिख रहे हैं। इधर बिजली विभाग कम खपत को देखते हुए उपभोक्ताओं को एवरेज खपत जोड़ कर बिल भेज रही हैं। इससे उपभोक्ताओं को काफी परेशानी होती है। जबकि एवरेज बिल के विरोध में कई बार आमजन से लेकर शहर के जनप्रतिनिधि भी इसका विरोध कर चुके है। इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी उपभोक्ताओं की परेशानी पर ध्यान नहीं दे रहे है। सबसे ज्यादा परेशानी बिल ठीक कराने के लिए आने वाले बुर्जुगों और महिलाओं को होती है। इन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई बार अधिकारियों के न मिलने से लोगों को कई चक्कर तक काटने पड़ते है। पड़ताल के मुताबिक उपभोक्ताओं पर 2 हजार रुपए तक बिल बढ़ाकर दिए जा रहे हैं। जिसकी वजह से लोगों में आक्रोश व्याप्त है। आलम यह है कि बढ़े हुए बिलों के कारण उपभोक्ताओं को हर महीने बिल भरने में परेशानी हो रही है।
मीटर रीडर कर रहे खेल
बिलों में गड़बड़ी के लिए सीधे तौर पर मीटर रीडर जिम्मेदार हैं। दरअसल प्राइवेट एजेंसी के पास रीडिंग का जिम्मा है। एजेंसी अपने कर्मचारी लगाकर मीटरों की रीडिंग कराती है। इन मीटर रीडरों के तार विभाग के उन बाबुओं से जुड़े होते हैं, जहाँ रीडिंग की फीडिंग होती हैं। उपभोक्ता जब बड़े अधिकारी के पास जाता है तो उसे जेई के पास जाने को कहा जाता है।
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