
उज्जैन। प्रदेश के साथ साथ उज्जैन में मानसून के प्रवेश के साथ ही अन्नदाताओं के चेहरे खिल उठे हैं। लंबे इंतजार के बाद हुई झमाझम बारिश ने खेतों में रौनक लौटा दी है और किसानों ने खरीफ सीजन की मुख्य फसल सोयाबीन की बोवनी का काम तेज कर दिया है। लेकिन एक तरफ जहां मौसम मेहरबान है, वहीं दूसरी तरफ डीएपी खाद की भारी किल्लत ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सहकारी समितियों के चक्कर काटने के बाद भी किसानों को पर्याप्त खाद नहीं मिल पा रही है।
जल जमाव का खतरा, निकासी जरूरी
अनुभवी किसानों ने इस मौसम में सावधानी बरतने की भी सलाह दी है। किसानों ने कहा कि अधिक बारिश की स्थिति में खेतों में जल भराव का खतरा रहता है, इसलिए खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था बेहद जरूरी है, ताकि बीज खराब न हो। कृषि विभाग के विशेषज्ञों ने किसानों को सख्त हिदायत दी है कि जल्दबाजी में बोवनी न करें। जब खेतों में कम से कम चार इंच तक पर्याप्त नमी (ओट) बन जाए, तभी सोयाबीन के बीज डालें। कृषि विभाग के अनुसार आने वाले दो-तीन दिनों में बारिश की संभावनाओं को देखते हुए जिले में सोयाबीन बोवनी की रफ्तार और तेज होगी। मानसून की इस आमद ने किसानों में नई उम्मीदें तो जगा दी हैं, लेकिन प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती खाद की सुचारु उपलब्धता सुनिश्चित कराना है, ताकि किसानों की मेहनत पर पानी न फिरे।
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