
नई दिल्ली/ उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बलिया में बांसडीह क्षेत्र के आसचौरा और चौकन गांव में मड़ुआ के आटे (Finger Millet Flour) से बनी रोटी-लिट्टी खाने के बाद 51 लोगों (51 People) की तबीयत बिगड़ गई। जीवित्पुत्रिका यानी जितिया व्रत से एक दिन पहले शुक्रवार को परंपरा के अनुसार लोगों ने मड़ुआ के आटे से बनी रोटी-लिट्टी (Roti-Litti) खाई थी। इसके कुछ देर बाद महिलाओं, पुरुषों और बच्चों को पेट दर्द, उल्टी, कंपकंपी और चक्कर की शिकायत होने लगी। देखते ही देखते बीमार लोगों की संख्या 51 तक पहुंच गई। परिजन और आसपास के लोग मरीजों (Patients) को बांसडीह सीएचसी, निजी अस्पतालों और जिला अस्पताल (District Hospital) लेकर पहुंचे। देर शाम स्वास्थ्य विभाग (Health Department) की टीम ने उस दुकान (Shop) को सीज कर दिया, जहां से मड़ुआ का आटा मिला था।
एक साथ बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने की जानकारी मिलते ही गांव से लेकर अस्पताल तक अफरातफरी मच गई। अस्पताल में एक बेड पर दो मरीजों को लिटाकर इलाज किया गया और स्ट्रेचर कम पड़ने पर कुछ मरीजों को गोद में उठाकर ले जाना पड़ा। डॉक्टरों की टीम ने फूड प्वाइजनिंग के लक्षणों के आधार पर उपचार शुरू किया। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने जिला अस्पताल के साथ प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया और मामले की जांच के निर्देश दिए। दोनों गांवों में दो एम्बुलेंस के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात की गई। जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह के अनुसार 49 लोग अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें 43 जिला अस्पताल, तीन बांसडीह सीएचसी और तीन निजी अस्पताल में हैं। सभी की हालत खतरे से बाहर बताई गई।
इस घटना में चौकन निवासी 35 वर्षीय सुनीता भी बीमार होकर जिला अस्पताल में भर्ती हैं। उनका छह माह का बेटा अस्पताल में पिता राजकुमार की गोद से मां को देखकर रो रहा था। सुनीता जितिया व्रत में अपने बेटे के स्वास्थ्य के लिए निर्जला व्रत रखने वाली थीं, लेकिन बीमार होने के कारण वह बच्चे को दूध पिलाने की स्थिति में नहीं थीं। डॉक्टरों की टीम को पिता ने बताया कि बच्चा अब तक केवल मां का दूध ही पीता है। वहीं, एक साथ 50 से अधिक लोगों के बीमार होने से अस्पताल में देर शाम तक मरीजों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा।
प्रारंभिक जांच में पता चला कि सभी को मड़ुआ का आटा एक ही जगह से मिला था। चौकन गांव के किसान रिंकू सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष उसे बांसडीह कचहरी स्थित सरकारी बीज भंडार से खेत में बोने के लिए मड़ुआ का बीज मिला था। वह बीज घर में रखा था। जितिया के लिए मड़ुआ का आटा नहीं मिलने पर उसने करीब दो किलो बीज आसचौरा में छितेश्वर वर्मा की चक्की पर पिसवा दिया। गुरुवार रात आटा तैयार हुआ। कुछ आटा चक्की संचालक ने अपने घर के लिए रखा और बाकी आटा किराने की दुकान पर पहुंचा, जहां से कुछ महिलाओं और ग्रामीणों को बांटा गया। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने दुकानदार सोनू वर्मा और किसान से पूछताछ की तथा दुकान को सीज कर दिया।
खाद्य विभाग की टीम ने आटे और उससे बनी रोटी के नमूने जांच के लिए लखनऊ भेजे हैं। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि मड़ुआ के बीज में केमिकल मिला हो सकता है और उसी बीज का आटा खाने से लोगों की तबीयत बिगड़ी। हालांकि इसकी पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद होगी। दोनों गांव अलग-अलग पंचायतों में हैं, लेकिन एक-दूसरे से सटे हुए हैं। यहां जितिया व्रत से एक दिन पहले मड़ुआ के आटे से रोटी या लिट्टी खाने की पुरानी परंपरा बताई गई है।
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