नई दिल्ली। वैसे तो ज्योतिष शास्त्र (Astrology) में हिन्दू धर्म (Hindu religion) में दशा और दिशा का स्थान बहुत महत्त्वपूर्ण बताया गया है। यहां तक कि शास्त्रों के मुताबिक हर क्षेत्र में दशा और दिशा पर बात होती है। वास्तु शास्त्र (Vaastu Shaastra) के मुताबिक जिस प्रकार मनुष्य का शरीर उसका घर है, उसी तरह वह शरीर जिसमें रहता है वह बड़ा घर है। इसलिए घर के अंदर का वास्तु कैसा हो यह जानना बेहद जरूरी है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार घर का वास्तु ठीक होना बेहद जरूरी है, वरना सफल-सुखी-संपन्न और सेहतमंद जिंदगी पाना सपना ही रह जाता है। इसलिए वास्तु शास्त्र के कुछ जरूरी नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है। वास्तु शास्त्र के मुताबिक यदि वास्तु खराब है तो प्रगति रुक जाएगी, गृहकलह बढ़ जाएगा या कोई बीमारी भी हो सकती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार दक्षिण दिशा को अशुभ माना गया है, इस दिशा में खिड़की नहीं बनवानी चाहिए।
वहीं अनजाने में की जा रहीं कई गलतियां भी धन हानि कराने, घर के लोगों की तरक्की-सेहत पर बुरा असर डालने का काम करती हैं।
वास्तु शास्त्र में इन गलतियों को धन हानि और मान हानि का बड़ा कारण माना गया है। यहां तक कि इन गलतियों के चलते कड़ी मेहनत और पैसे बचाने की हर कवायद फेल हो जाती है और तमाम कोशिशों के बाद भी गरीबी दूर नहीं होती है।
नल से पानी टपकना केवल पानी का बहना नहीं है, यह घर का पैसा और सम्मान की भी बर्बादी है। वास्तु शास्त्र में नल से पानी के टपकते रहने को बहुत ही अशुभ माना गया है। ऐसा होना बेवजह के खर्चे बढ़ाता है, साथ ही परिवार की इज्जत पर भी बुरा असर डालता है।
रात में खाने के बाद जूठे बर्तन किचन में छोड़ना बहुत ही गलत है। ऐसा करना सेहत पर बुरा असर डालता है। घर के मुख्य द्वार पर यदि गंदगी हो, दरवाजा गंदा हो, उसमें दरार हो तो उस घर में कभी भी पैसा नहीं टिकता है। यदि दरवाजा खराब है तो उसे तुरंत ठीक करा लें। यहां तक कि दक्षिण पश्चिम दिशा में कोई शौचालय नहीं होना चाहिए, यदि ऐसा होता है तो इसे पितृ दोष भी माना जाता है। यही कारण है कि जिन घरों के दक्षिण- पश्चिम दिशा में शौचालय होते हैं, उनमें राहु और पितृदोष के कारण हमेशा नकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
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