
नई दिल्ली । भारत (India) का अमीर वर्ग (wealthy class) अब महंगे पानी (Expensive water) पर पैसा खर्च करने लगा है.ना सिर्फ देश में मिलने वाले बोतल बंद पानी (Bottled water) बल्कि विदेशी कपंनियों (Foreign companies) के पानी की मांग भी भारत में तेजी से बढ़ रही है.भारत का अमीर वर्ग अब महंगे पानी पर पैसा बहा रहा है.भारत में कुछ लग्जरी फूड स्टोर अब इटली और फ्रांस से महंगे पानी मंगाकर उनका स्वाद चखने के लिए बड़े आयोजन कर रहे हैं.हालांकि, ऐसे आयोजन फिलहाल भारत के अमीर वर्ग से आने वाले लोगों तक ही सीमित हैं.
अवंति मेहता जो ऐसे आयोजन करवा रही हैं बताती हैं कि यहां आने वाले लोग पानी के सैंपल के मिनरल, कार्बन और खारेपन की जांच करते हैं.रॉयटर्स की एक खास रिपोर्ट के मुताबिक यहां फ्रांस की पहाड़ियों से एवियां, दक्षिणी फ्रांस से पेरिये, इटली से सैन पेलग्रिनो और भारत की अरावली की पहाड़ियों से आवा जैसे बोतल बंद पानी के ब्रैंड मौजूद होते हैं.
अवंति कहती हैं कि सारी कंपनियों के पानी का स्वाद अलग अलग होता है और लोगों को ऐसा पानी चुनना चाहिए जिससे उन्हें किसी तरह का पोषण हासिल हो.वह खुद को भारत में पानी की सबसे युवा पानी “सोम्मेलिएर” बताती हैं.यह शब्द अब तक वाइन के स्वाद की परख रखने वाले जानकारों के लिए इस्तेमाल होता था. अवंति का खुद का परिवार भी “आवा मिनरल” नाम की कंपनी चलाता है.लग्जरी बनता जा रहा है बोतल बंद पानीबेहद खास गुणवत्ता वाले पानी का व्यापार आज भारत में 400 मिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है.
यहां की बढ़ती आबादी को देखते हुए कहा जा सकता है कि यह व्यापार और आगे बढ़ेगा.खासकर भारत का अमीर वर्ग अब इसे एक स्टेटस सिंबल के तौर पर भी देखने लगा है.भारत में सबसे महंगे और खास मिनरल वाले एक लीटर बोतल बंद पानी की कीमत 80 से 100 रुपये के बीच है.वहीं, विदेशों से आने वाले पानी की एक बोतल की कीमत 275 रुपये के आसपास है.1.4 अरब की आबादी वाले देश भारत में पीने का साफ पानी एक विशेषाधिकार बन गया है.
शोधकर्ताओं के मुताबिक भारत का 70 फीसदी भूजल प्रदूषित हो चुका है.नल से आने वाला पानी पीने लायक नहीं है. बीते साल दिसंबर के महीने में ही इंदौर में गंदा पानी पीने से 16 लोगों की मौत हो गई थी.भारत में कई लोग अब बोतल बंद पानी को एक जरूरत मानते हैं.किराना दुकानों में पानी की एक लीटर की बोतल 20 रुपये में मिलती है.
पीने के पानी के कारोबार की सालाना कीमत करीब पांच अरब डॉलर है.24 फीसदी की बढ़त के साथ भारत में यह बाजार दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रहा है.बोतल बंद पानी का बढ़ता बाजार30 अरब डॉलर से अधिक के बाजार वाले बोतल बंद पानी की मांग चीन और अमेरिका में सुविधाओं की बुनियाद पर टिकी है.
हर साल इस बाजार में यहां चार से पांच फीसदी की बढ़त देखी जा रही है.मार्केट रिसर्च कंपनी यूरोमॉनिटर के मुताबिक भारत में प्रीमियम पानी की मांग बढ़ती जा रही है.2021 में यह मांग 1 फीसदी थी जो 2025 में बढ़कर 8 फीसदी हो गई.
यूरोमॉनिटर में बतौर सीनियर कंसल्टेंट काम कर रहे अमूल्य पंडित कहते हैं कि नगर निगम से आने वाले पानी पर कम होते भरोसे के कारण बोतल बंद पानी की मांग बढ़ गई है. पंडित बताते हैं, “अब लोगों को समझ आ गया है कि मिनरल वॉटर स्वास्थ्य के लिए अच्छा है. यह महंगा है लेकिन इसका बाजार और आगे बढ़ने वाला है.
भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली 20 रुपये की पानी की बोतल ज्यादातर पेप्सी, कोका कोला और बिसलेरी जैसी कंपनियां बनाती हैं.जो लोग इसका खर्च नहीं उठा सकते वे वॉटर प्यूरिफायर से काम चलाते हैं जो पानी तो साफ करता है लेकिन उसके मिनरल भी हटा देता है”स्पार्कलिंग और स्प्रिंग वॉटर की मांगभारत में अब स्टिल वॉटर के साथ साथ स्पार्कलिंग और स्प्रिंग वॉटर की भी मांग में तेजी दिखने लगी है.
भारतीय कंपनी टाटा ने खुद स्पार्कलिंग वॉटर का प्लांट शुरू किया है और स्प्रिंग वॉटर के उत्पादन में भी उतरने की सोच रहा है ताकि लोगों को वह और अधिक विकल्प दे सके.खुद आवा कंपनी की सेल भी पिछले साल अपने रिकॉर्ड स्तर 9 मिलियन डॉलर पर जा पहुंची.वहीं, टाटा के मुताबिक उसके पानी के कारोबार की हर साल 30 फीसदी के हिसाब से आगे बढ़ने की संभावना है.
अवंति कहती हैं कि जब आप नल से पानी पीते हैं तो आपको वहां से आवा या एवियां नहीं मिलता और आप इसकी ही कीमत चुकाते हैं.पानी का स्वाद चखने आए कुछ लोग बताते हैं कि उन्हें यह अनुभव तो अच्छा लगा लेकिन पानी की कीमत निगलना उनके लिए थोड़ा मुश्किल रहा.
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