
नई दिल्ली।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister) की प्रस्तावित इजरायल यात्रा को लेकर कूटनीतिक और सामरिक हलकों में हलचल तेज है। पिछले आठ वर्षों में यह उनकी पहली इजरायल यात्रा मानी जा रही है और माना जा रहा है कि इस दौरान रक्षा (Defense), ऊर्जा (Energy) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) जैसे अहम क्षेत्रों में बड़े समझौते (Agreements) हो सकते हैं। इसी पृष्ठभूमि में एक और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है कि इजरायल ने भारत को अपने उन्नत मिसाइल सिस्टम गोल्डन हेरोइजन की पेशकश (Offer) की है। हालांकि इस प्रस्ताव पर अभी तक न तो भारत और न ही इजरायल की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि की गई है लेकिन रणनीतिक विशेषज्ञ इसे बेहद अहम मान रहे हैं।
इजरायल लंबे समय से क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का सामना करता रहा है। हमास के साथ जारी संघर्ष और ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच उसने अपनी मिसाइल और एयर डिफेंस क्षमताओं को लगातार मजबूत किया है। इसी क्रम में गोल्डन हेरोइजन नामक एयर लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम को विकसित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। सार्वजनिक तौर पर इस प्रणाली के बारे में बहुत सीमित जानकारी उपलब्ध है लेकिन अमेरिकी दस्तावेजों के कथित लीक के बाद यह चर्चा तेज हुई कि इजरायल गोल्डन हेरोइजन और रॉक्स नामक दो उन्नत प्रणालियों पर काम कर रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार गोल्डन हेरोइजन की अनुमानित मारक क्षमता 1500 से 2000 किलोमीटर के बीच बताई जाती है। कुछ रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे लड़ाकू विमान से दागा जाए तो इसकी प्रभावी रेंज लगभग 800 किलोमीटर तक हो सकती है। इस क्षमता का अर्थ यह है कि विमान शत्रु के हवाई क्षेत्र में प्रवेश किए बिना ही रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना सकता है। यह विशेषता आधुनिक युद्ध की परिस्थितियों में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इससे पायलट और विमान दोनों की सुरक्षा बढ़ जाती है।
तकनीकी दृष्टि से यह मिसाइल विमान से छोड़े जाने के बाद ऊंचाई पर बैलिस्टिक पथ का अनुसरण करती है और फिर लक्ष्य की ओर तीव्र गति से गिरती है। अंतिम चरण में इसकी रफ्तार मैक 5 से अधिक बताई जाती है जिससे इसे हाइपरसोनिक श्रेणी के करीब माना जाता है। तुलना करें तो भारत की सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल की गति लगभग मैक 2.8 है। इस लिहाज से गोल्डन हेरोइजन की गति और प्रहार क्षमता उसे विशेष बनाती है।
भारत के लिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि भारतीय वायुसेना पहले से ही लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। यदि यह प्रणाली भारतीय वायुसेना के सुखोई 30 एमकेआई जैसे लड़ाकू विमानों के साथ एकीकृत की जाती है तो यह दुश्मन के गहरे और सुरक्षित ठिकानों पर भी प्रभावी प्रहार करने में सक्षम हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह मिसाइल भारी सुरक्षा वाले और भूमिगत ढांचों को भेदने की क्षमता रखती है जो आधुनिक युद्ध रणनीति में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
हाल के वर्षों में भारत ने अपनी सैन्य ताकत को आत्मनिर्भरता और आधुनिक तकनीक के जरिए लगातार उन्नत किया है। ऐसे में यदि गोल्डन हेरोइजन जैसे सिस्टम पर कोई ठोस प्रगति होती है तो यह भारत की वायुशक्ति को नई रणनीतिक बढ़त दे सकता है। फिलहाल आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है लेकिन इतना तय है कि पीएम मोदी की इजरायल यात्रा सिर्फ कूटनीतिक नहीं बल्कि सामरिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
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