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इंदौर को शराब से 2104 करोड़ कमाने का लक्ष्य

February 25, 2026

पिछले साल 1753 करोड़ में बिकी थीं जिले की 173 शराब दुकानें, नई नीति में 20 त्न दाम बढ़ाए
शराब व्यवसायी पहले ही बढ़ी हुई कीमतों से थे परेशान, अब कीमतें और बढ़ जाने से बढ़ेगी परेशानी

इंदौर, विकाससिंह राठौर।
मध्यप्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने हाल ही में अपनी नई आबकारी नीति (Excise Policy), जिसे आम भाषा में शराब नीति भी कहा जाता है, घोषित कर दी है। इसमें शासन ने प्रदेश की सभी शराब दुकानों (liquor stores) का मूल्य 20 प्रतिशत बढ़ाने का फैसला लिया है। इस बढ़त के बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 में इंदौर को शराब दुकानों से 2104 करोड़ रुपए (Rs 2104 crore) कमाने का लक्ष्य मिला है।



  • मध्यप्रदेश में शराब की कुल 3,553 दुकानें हैं। इनमें से इंदौर जिले में 173 दुकानें हैं। राज्य शासन द्वारा हाल ही में जारी की गई आबकारी नीति 2026-27 में सभी शराब दुकानों की कीमत को 20त्न बढ़ाने का फैसला लिया गया है। इसके तहत मौजूदा सत्र में जहां इंदौर की सभी 173 दुकानें 1,753 में बिकी थीं, वहीं अब नई नीति के तहत इनकी कीमत बढक़र 2,104 करोड़ रुपए हो जाएगी। यानी सरकार ने इंदौर की शराब दुकानों से पिछले साल की अपेक्षा इस साल 351 करोड़ रुपए ज्यादा कमाने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही नई आबकारी नीति में शासन ने और भी कई बदलाव किए हैं, जिससे कई चीजें आसान होंगी, वहीं कई परेशानियां भी सामने आएंगी।

    शराब कारोबारियों से लेकर शराबियों तक पर बढ़ेगा बोझ
    शराब दुकानों की कीमतों में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी से जहां शासन को भारी राजस्व मिलेगा, वहीं दूसरी ओर वहीं शराब व्यापारियों से लेकर शराबियों तक के लिए यह फैसला बड़ा बोझ बनेगा। पिछले साल बढ़ाई गई कीमतों पर भी शराब कारोबारियों ने विरोध जताया था और 35 दुकानें कई बार नीलामी प्रक्रिया करने के बाद भी समय पर नहीं बिक पाई थीं, जिसे देखते हुए शासन ने इनकी कीमतों को कम किया था। वहीं इस बार 20 प्रतिशत की वृद्धि के बाद दुकानों को खरीदना कारोबारियों के लिए और मुश्किल होगा। वहीं शराब की कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि होने से शराबियों पर भी बोझ बढ़ेगा।

    नए नियम भी बन सकते हैं परेशानी
    शासन ने नई शराब नीति में पहले की तरह पूर्व मेें ठेका संचालित करने वाले ठेकेदारों को लाइसेंस नवीनीकरण के नियम को भी खत्म कर दिया है। पहले जो संचालक जो दुकान संचालित करता था, उसे नई दरों पर ठेके के नवीनीकरण में प्राथमिकता दी जाती थी। अगर ठेकेदार इसमें रुचि नहीं दिखाता था, तब ऐसे ठेकों की नीलामी होती थी, लेकिन इस बार पहले से मौजूद ठेकेदारों को प्राथमिकता नहीं मिलेगी और सभी ठेकों की फ्रेश नीलामी होगी। शासन को उम्मीद है कि इससे तय कीमत से भी ऊंची बोली आसानी से मिलेगी और लक्ष्य को आसानी से पूरा किया जा सकेगा। वहीं इस नियम से ठेकेदार परेशान हैं।

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